+

यमराज ने युवक को पुस्तक देकर कहा- जो लिखोगे सच होगा, फिर..

एक पुरानी कहानी के अनुसार एक बार एक युवक को यमराज मिले, लेकिन युवक उन्हें पहचान नहीं पाया। उसने यमराज को पीने के लिए पानी दिया। इसके बाद यमराज ने युवक से कहा कि मैं तुम्हारे प्राण लेने आया था, लेकिन तुमने मुझे पानी पिलाया, इस कारण मैं तुमसे खुश हूं। तुम्हें एक अवसर देता हूं, तुम अपना भाग्य बदल सकते हो। यह कहकर यमराज ने एक दिव्य पुस्तक युवक को दी और कहा कि इस पुस्तक में तुम्हारे नाम का भी एक पृष्ठ है।

प्रतीकात्मक

 

वहां तुम अपने लिए जो चाहते हो, वह लिख सकते हो। जैसा लिखोगे, वैसा ही होगा, इससे तुम अपनी मृत्यु भी टाल सकते हो, भाग्य बदल सकते हो, लेकिन एक बात का ध्यान रखना, तुम्हारे पास ज्यादा समय नहीं है। इसीलिए जल्दी ही अपने लिए जो कुछ लिखना चाहते हो तो लिख दो। युवक ने जैसे ही पुस्तक खोली तो उसमें लिखा था कि तुम्हारे दोस्त को खजाना मिलने वाला है। उसने वहां लिख दिया कि उसे खजाना न मिले। युवक ने अगला पृष्ठ खोला तो उस पर लिखा था कि तुम्हारा पड़ोसी राजा का मंत्री बनने वाला है। युवक ने वहां लिख दिया कि वह मंत्री न बने।

कुछ ही देर में उसे अपने नाम का पृष्ठ मिला, वह खुद के लिए अच्छा-अच्छा लिखने के लिए सोचने लगा, लेकिन जैसे ही वह लिखने वाला था, यमराज ने उससे पुस्तक ले ली। यमराज ने युवक से कहा कि अब तुम्हारा समय खत्म हो गया है। तुम दूसरों का बुरा करने के चक्कर में खुद का भला नहीं कर सके। इस बात का युवक को पछतावा होने लगा कि उसने सुनहरा अवसर खो दिया। इसके बाद यमराज ने उस युवक के प्राणों का हरण कर लिया।

प्रतीकात्मक

 

शिक्षा- 

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि काफी लोग जिंदगी भर दूसरों का बुरा सोचते रहते हैं। इस चक्कर में वे खुद पर ध्यान नहीं देते और अपनी ही जिंदगी बरबाद कर देते हैं। हम दूसरों का भला न कर सके तो कम से कम किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए। यही सच्ची मानवता है।