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इस वजह से मनाई जाती है होली, राधा-कृष्ण के प्रेम से जुडी है ये कहानी

मार्च का आधा महीना बीत चुका है और कुछ ही दिनों में होली का त्यौहार भी आने वाला है। होली हिन्दू धर्म के पवित्र त्यौहार में से एक है। होली के पीछे कई कहानियां ग्रंथों में मौजूद हैं, जिनमें से होलिका दहन वाली हमें बचपन से बताई गई है। लेकिन इसके अलावा होली का त्यौहार राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी से भी जुड़ा हुआ है। बाद में ये एक परंपरा बन गई और शायद यही वजह है कि मथुरा में फूलों से भी होली खेली जाती है। कहा जाता है कि तभी से इस पर्व को मनाने की मान्यता शुरू हुई थी। 

प्रतीकात्मक

 

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक अकाशवाणी में भगवान ने कंस को चेतावनी देते हुए बताया कि देवकी की आठवीं संतान के हाथों उसका वध होगा। कंस के अनेक कोशिश करने के बाद भी देवकी के आठवें पुत्र कृष्ण जिंदा बच गए। इसके बाद जब कंस को श्रीकृष्ण के गोकुल में होने का पता चला, तो उसने पूतना नाम की राक्षसी को गोकुल में हर नए जन्में बच्चे को मारने के लिए भेजा। पूतना को ये वरदान प्राप्त था कि वो अपनी इच्छा अनुसार अपना रूप बदल सकती है। अब पूतना ने धीरे-धीरे गोकुल गांव के सभी बच्चों को मारना शुरू कर दिया। इसके बाद एक दिन आखिरकार पूतना यशोदा- नंद के घर कृष्ण को मारने के लिए भी पहुंच गई। 

प्रतीकात्मक

 

अपने रंग नीला होने से परेशान हो गए थे कृष्ण

पूतना ने नन्हें कान्हा को मारने के लिए उन्हें अपना जहरीला स्तनपान कराने की कोशिश की। लेकिन बालगोपाल कृष्ण ने उस राक्षसी का वध कर दिया। फिर भी पूतना का दूध पीने की वजह से श्री कृष्ण का शरीर गहरे नीले रंग का पड़ गया था। अब सौम्य और सुंदर दिखने वाले कृष्ण नीले रंग के दिखने लगे थे। कृष्ण इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि अब उनका गोरापन कहीं खो हो चुका है। कृष्ण सोचने लगे कि उनका ये रूप ना राधा को पसंद आएगा ना गोपियों को। 

फाल्गुन के पूर्णिमा को मनाई जाती है होली

इसके बाद माता योशादा ने कृष्ण को सलाह दी कि वो राधा को भी उसी रंग में रंग डालें जिसमें वो उसे देखना चाहते हैं। तब कृष्ण, राधा के पास गए और उनके ऊपर ढेर सारा रंग उड़ेल दिया। उस एक घटना के बाद दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब गए और तभी से इस दिन को होली के उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। बता दें, उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा का अवसर था, इसलिए होली का त्योहार हमेशा फाल्गुन महीने में मनाया जाता है।