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आखिर भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता भांग, धतूरा तथा बेलपत्र

 भगवान शिव के बारे में लोक प्रचलित मान्यता है कि वे भांग, धतूरा तथा बेलपत्र जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं। अतः शिवभक्त पूजन के दौरान उन पर इस प्रकार की चीजें चढ़ाते भी हैं। लेकिन वास्तविकता इससे बहुत अलग है। असल में पौराणिक कथाओं में भगवान शिव को पर्वतों पर निवास करने वाले एक महायोगी के रूप में दर्शाया गया है। आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत से योगी निवास करते हैं। सर्दी के मौसम में वहां का तापमान वार्फवारी के कारण काफी गिर जाता है। उस समय गांजा, धतूरा तथा भांग जैसी चीजें उनके शरीर को गर्म रखने में बहुत सहायक होते हैं। यदि इन चीजों को सीमित मात्रा में लिया जाए तो ये चीजें मानव शरीर के लिए ओषधि का कार्य करती हैं। इस प्रकार से पर्वतीय योगियों के जीवन के लिए ये चीजें बहुत सहायक होती हैं। भांग-धतूरे और गांजा जैसी नशीली चीजों को भगवान शिव के साथ में जोड़ने का एक दार्शनिक कारण भी है। असल में जब हम इन चीजों को भगवान शिव को चढ़ाते हैं तो एक प्रकार से हम नशीली चीजों से दूर रहने तथा उनका सेवन न करने का प्रण भी करते हैं। 

प्रतीकात्मक

 

बेलपत्र का महत्व - 

भगवान शिव को बेलपत्र भी चढ़ाया जाता है। इसका अपना महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अवश्य चढ़ाना चाहिए। ,इसको अर्पण करने से भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र में तीन पत्तियां होती हैं लेकिन तीन पत्तियों को एक ही पत्ती माना जाता है। मान्यता है की तीनों पत्तियां सृष्टि के तीन गुणों सत, रज तहा तम गुण का प्रतीक होती है साथ ही ये भगवान विष्णु, शिव तथा ब्रह्मा का भी प्रतीक मानी जाती हैं। अतः तीन पत्तियों वाली एक बेलपत्र को पूरा ही चढाने का प्रावधान है। बेलपत्र एक अच्छी ओषधि का कार्य भी करता है। बेलपत्र की तासीर ठंडी होती है तथा गर्मी के दिनों में इसके तथा इसके फल बेल के शर्बत का सेवन आपको गर्मी तथा उससे होने वाली सभी समस्याओं से बचाकर रखता है। बेल का शर्बत गर्मी के मौसम में लू लगने, अपच की समस्या, पेट में कीड़े होना, आंखों की रौशनी की समस्या में बहुत कारगर होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।