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राधा-कृष्ण को सभी जानते हैं, अब जानें श्रीकृष्ण की संतानों के बारे में

राधा-कृष्ण को कृष्ण को प्रेम का जीवंत उदहारण माना जाता है। राधा-कृष्ण के बहुत से मंदिर देश वदेश में स्थापित हैं। जिनमें लोग अपनी श्रद्धा तथा भक्ति के साथ प्रवेश कर जीवन को धन्य मानते हैं। राधा-कृष्ण के करोड़ो भक्त देश दुनिया में मौजूद हैं। मानवीय विचार रखने वाले लोगों का मानना है की देश, धर्म तथा जाति से दूर रहकर यदि मानव अपना जीवन आनंद से जीना चाहता है तो उसको सर्वव्यापी प्रेम को स्वीकार करना ही होगा जो श्री राधा-कृष्ण के रूप में दुनिया के सामने उपस्थित है। राधा-कृष्ण के बारे में अनेक कथाएं भागवत पुराण में हैं लेकिन आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण की नहीं बल्कि उनके पुत्र के बारे में वह जानकारी यहां दे रहें हैं। जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 

प्रतीकात्मक

 

साम्ब था श्रीकृष्ण का पुत्र - 

आपको बता दें की भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र का नाम साम्ब था। यह श्रीकृष्ण तथा उसकी पत्नी जामवंती का पुत्र था। बहुत कम लोग जानते हैं कि साम्ब का विवाह दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा के साथ हुआ था। लेकिन यह विवाह दुर्योधन की मर्जी के खिलाफ हुआ था। असल में यह विवाह एक लव मैरिज थी। जिसको दुर्योधन को न चाहते हुए भी मानना पड़ा था। आइये अब आपको विस्तार से बताते हैं इस विवाह के बारे में। 

 

प्रतीकात्मक

साम्ब ने किया था लक्ष्मणा का अपहरण - 

बहुत कम लोग जानते हैं की श्रीकृष्ण तथा कौरब जयेष्ठ दुर्योधन एक काफी मजबूत रिश्ते में बंधे हुए थे। असल में हुआ यह था की श्रीकृष्ण तथा उनकी पत्नी जामवंती के पुत्र साम्ब का दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा के साथ प्रेम प्रसंग था। लेकिन यह संबंध श्रीकृष्ण के साथ साथ दुर्योधन को भी पसंद नहीं था। अतः दुर्योधन ने अपनी पुत्री लक्ष्मणा का शीघ्र विवाह करने हेतू स्वयंवर रख दिया। जब साम्ब को इस बात का पता लगा तो उसने स्वयंवर से पहले ही लक्ष्मणा का अपहरण कर लिया। इसके बाद किसी प्रकार से दुर्योधन ने साम्ब को पकड़ लिया तथा बंदी बना लिया। 

प्रतीकात्मक

 

बलराम का किया कौरवो ने अपमान - 

इस घटना के बाद में श्रीकृष्ण ने यादवों से इस बात की चर्चा की, जिसका परिणाम हस्तिनापुर पर आक्रमण कर साम्ब को छुड़ा लाने के रूप में निकला। लेकिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम ने इस कार्य को रोक डाला। उनका कहना था की दुर्योधन को गदा युद्ध मैंने सिखाया अतः वह मेरा शिष्य है। इसलिए युद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है मैं खुद हस्तिनापुर जाकर एक गुरु के हक़ से उसको वापस बिना किसी युद्ध के ले आऊंगा। 

बलराम हस्तिनापुर गए लेकिन वहां उनका विचार गलत निकला। कौरवों ने उनका भरे दरवार में मजाक बनाया। इससे आहात होकर वे क्रोध से भर उठे तथा उन्होंने अपने हल से हस्तिनापुर को उखाड़ डाला और उसको गंगा नदी में प्रवाहित करने के लिए ले जानें लगे। इतना होने पर दुर्योधन अपने अन्य भाइयों सहित बलराम के पास पहुचें तथा उनसे माफ़ी मांगकर साम्ब तथा लक्ष्मणा के विवाह को न चाहते हुए भी अनुमति दे दी। इस प्रकार इ श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब तथा दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा का विवाह संपन्न हुआ और दोनों एक दूसरे के समधी बने।