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कुंभ - सैकड़ो विदेशी महिलाओं ने लिया संन्यास, बढ़ा हिंदुत्व के प्रति अनुराग

इसको आप दुनिया के प्रति विरक्ति कहें या हिंदुत्व के प्रति अनुराग। आज के आधुनिक समय में महिलाओं में पुरुषों की तुलना में संन्यास लेने का चलन बढ़ा है। यह अनुराग अब इतना बढ़ चुका है की महिलायें अखाड़ों के पुरुष सन्यासी लोगों का वर्चस्व तोड़ने लगी हैं। पिछली बार कुंभ उज्जैन में हुआ था लेकिन पिछली बार की तुलना में इस बार प्रयागराज कुम्भ में महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर बड़ी संख्या में संन्यास को ग्रहण किया है। संगम तट पर इस भव्य कुंभ में अब तक 250 से ज्यादा महिलाएं संन्यास को ग्रहण कर चुकी हैं। इन महिलाओं में रूस, नेपाल, इटली, हंगरी तथा स्विटजरलैंड की भी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। अब संन्यास ले चुकी ये महिलाएं अपने अपने गुरुओं के मठो तथा आश्रमों की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगी।

प्रतीकात्मक

 

बुधवार को जूना अखाड़े के तत्वाधान में नेपाल की बहुत सी महिलाओं ने संन्यास को ग्रहण किया। इसी समय बहुत सी पढ़ी लिखी तथा विदेशी महिलाओं ने भी संन्यास ग्रहण किया है। इटली के आई टारा नामक महिला पिछले कई वर्षों से काशी में वेद अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने हालही में संन्यास ग्रहण कर जूना अखाड़े की 13 मढ़ी की महंत मीरा पुरी को अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक बनाया है। वे पिछले एक वर्ष से महतं मीरा पूरी के संपर्क में थीं। संगम की रेती पर उनका पहले मुंडन किया गया तथा उसके बाद में पंच गुरु संस्कार विधि विधान किया गया।

प्रतीकात्मक

 

अब टारा सनातन धर्म तथा संस्कृति का प्रचार करेगी। टारा को संन्यास के बाद में रम्या गिरि नाम दिया गया है। वे कहती हैं की "अब वे सनातन धर्म का प्रचार करेंगी तथा अब वे पूरी तरह से भारतीय हो चुकी हैं। भारतीय संस्कृति ने उनको इतना ज्यादा प्रभावित किया है की वे सन्यासी बन चुकी हैं।"  इसी प्रकार पिछले दिनों हंगरी से आई डॉक्टर अनिको भी हिंदुत्व के प्रति अनुराग से भर गई। इसके बाद में उन्होंने आधुनिक जीवन का त्याग कर महामंडलेश्वर साध्वी हेमानंद गिरि से संन्यास ग्रहण कर लिया। अब वे हंगरी में ही आश्रम बनाकर वहां सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार करेंगी। इसी प्रकार से अन्य बहुत सी विदेशी महिलाओं ने कुंभ में संन्यास ग्रहण किया है।