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दिल्ली के रेड लाइट एरिया में बेहद ख़ास होता है न्यू ईयर का जश्न

नए साल के जश्न के लिए कोई गोवा या मनाली जा रहा है तो कोई काशी या हरिद्वार जैसे आध्यात्मिक शहरों में। वर्तमान में नए साल के जश्न के लिए दिल्ली के होटल, रेस्टोरेंट तथा 5 स्टार बुक हो चुके हैं। सभी लोग अपने अपने तरीके से नए साल का स्वागत करने के लिए आतुर हैं। इन सभी के बीच में दिल्ली का रेड लाइट एरिया जीबी रोड भी काफी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

प्रतीकात्मक

 

नए साल पर दिल्ली के जीबी रोड में बहुत से लोग पहुंचते हैं। इस समय इस क्षेत्र में इतनी भीड़ होती है की पुलिस को भीड़ को काबू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। नए वर्ष के दौरान जीबी रोड पर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर के लोग भी काफी संख्या में आते हैं। नए साल पर यहां के कई कोठो पर बाहर से भी लड़कियां बुलाई जाती हैं। यहां पर तीन से चार कोठे ऐसे भी हैं जिनमें साल के आखरी दिन मुजरा भी होता है। 

कोठा नंबर-54 की संचालिका का बयान - 

साल के कुछ गिनेचुने दिनों को छोड़ दें तो यहां अब कुछ काम नहीं रह गया है। नए साल पर काफी लोग यहाँ आते हैं वैसे सामान्य दिनों में 9 से 10 बजे के बीच काम शुरू हुआ है। लेकिन 31 दिसंबर को जीबी रोड की मार्किट जल्दी बंद हो जाती है और शाम 7 बजे से ही लोग कोठो पर आने लगते हैं। यही खास दिन होता है जब यहां का छोटा बड़ा कोठा रातभर गुलजार रहता है तथा रात 4 बजे तक यहां पर लोगों का हुजूम बना रहता है। कई बात टोली या ग्रुप में आने वाले लोग आपस में झगड़ा कर लेते हैं। कुल मिलाकर नए वर्ष के एक दिन पहले जीबी रोड पर काफी भीड़ होती है। झगड़ा न हो इसलिए कई बार पुलिस की सहायता भी ली जाती है। पिछले वर्ष 31 दिसंबर को जीबी रोड कर काफी बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित हुई थी जिसके बाद पुलिस को सड़क के दौनों और बेरिकेड लगा डालें थे। 

प्रतीकात्मक

 

वर्कर काव्या (काल्पनिक नाम) बताती हैं

नए साल के मौके पर यहां बहुत से युवक बोतल लेकर आने की जिद करते हैं। इस कारण कई बार मारपीट भी हो जाती है। जो लोग ग्रुप में आते हैं वे लोग अधिकतर वर्कर से छेड़खानी करते हैं। इस प्रकार के लोग सीढ़ियां न चढ़ सकें इसके लिए हम लोग अपने स्तर पर कुछ इंतजाम करते हैं। यदि भीड़ ज्यादा बढ़ जाती है तो हम लोग पुलिस को इत्तला कर देते हैं। 

मुजरे के अलावा नाच गाने का रंग

यदि कोई व्यक्ति सेक्स वर्कर के साथ में नाचना चाहता है तो उसकी इच्छा को भी स्वीकार किया जाता है। मध्यम आवाज के स्पीकर लगाकर उनकी इच्छा को पूरी किया जाता है। हालांकि अब मुजरा दो-चार कोठो पर ही होता है। पहले हर कोठे पर मुजरे की मांग होती थी लेकिन अब यह सारा काम सिमट चूका है। जीबी रोड की एक ख़ास बात यह भी है की यहां 31 दिसंबर की रात को भी रेट वही होता है जो सामान्य दिनों में रहता है यानि 200 से 300 रुपये के करीब होता है। यहां कमा करने वाली वर्कर कहती हैं कि "31 दिसंबर को यहां काफी भीड़ होती है लेकिन फिर भी यहां का रेट हम नहीं बढ़ाते हैं। यदि कोई ग्राहक अपनी ख़ुशी से कुछ दे जाता है तो बात और है लेकिन यहां का रेट भीड़ देखकर कभी बढ़ाया नहीं जाता यदि यहां की खासियत है।