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अब भारतीय वायुसेना हो जाएगी और भी शक्तिशाली

भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) आज GSAT-7A का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से करेगा। आपको बता दें की GSAT-7A भारत का भूस्थैतिक संचार उपग्रह है। इसको भारतीय वायु सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है। वायु सेना को इस उपग्रह के जरिये एयरबेस, एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टपम, भूमि के रडार स्टेकशन से इंटरलिंकिंग की सुविधा मिलेगी। जिससे वायु सेना की नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा ग्लोसबल ऑपरेशंस में भी वायु सेना की दक्षता बढ़ेगी। 

 GSAT-7A  देगा वायुसेना को कई सुविधाएं - 

प्रतीकात्मक

 GSAT-7A से वायु सेना न सिर्फ अपने विभिन्न एयरबेस से जुड़ सकेगी बल्कि ड्रोन संबंधी आपरेशन में भी इसे मदद मिलेगी। इस प्रकार के उपग्रह नियंत्रित अनमैन्डक एरियल व्हीबकल होते हैं जो लंबी दूरी से दुश्मनों को ठिकाने लगा सकते हैं। आपको बता दें की GSAT-7A को जीएसएलवी-एफ11 प्रक्षेपण यान से आज शाम 4.10 पर प्रक्षेपित किया जाना है। यह उपग्रह करीब 2,250 किलोग्राम का है और इसका जीवनकाल 8 वर्ष का है। इस उपग्रह का निर्माण करने में करीब 500-800 करोड़ की लागत आयी है। इससे पहले इसरो ने 29 सितंबर, 2013 को जीसैट-7 लांच किया था, जिसको रुक्मणि के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय नौसेना के लिए था। कुछ ही वर्षो में भारतीय वायु सेना को जीसैट-7सी उपग्रह के मिलने की उम्मीद भी की जा रही है। GSAT-7A के लिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में दोपहर दो बजकर 10 मिनट से उल्टी गिनती शुरू हो चुकी हैं। यह अब तक का 39वां संचार सैटलाइट होगा तथा वायुसेना को सुविधाएं देने के लिए लांच किया जा रहा है।