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अब एटीएम हो सकते हैं बंद

दो साल पहले नोटबंदी का असर यह हुआ है कि अब देश में कैश निकालने वाली आधे से अधिक एटीएम बंद होने वाली है। यह बदलाव रेग्युलेटरी बदलावों के कारण होगा, जिसका असर मार्च 2019 के बाद देखा जा सकता है। इसे कैश के लिए एटीएम पर निर्भर रहनेवालों के लिए बुरी खबर माना जा सकता है।

देश में अभी तकरीबन 2.38 लाख मशीनें हैं, इनमें से ही आधी बंद हो सकती हैं। इस बारे में एटीएम उद्योग परिसंघ (सीएटीएमआई) ने 21 नवंबर को बताया कि एटीएम के बंद होने से हज़ारों रोज़गार प्रभावित होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार बंद किए जाने वाले अधिकतर ग्रामीण इलाकों के हो सकते हैं। ऐसे में कैश की कमी की वजह से इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

परिसंघ के अनुसार सर्विस प्रोवाइडर देश भर में मार्च 2019 तक 1.13 लाख एटीएम बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। इन आंकड़ों में क़रीब एक लाख बैंक शाखाओं से हटकर लगाये गये एटीएम तथा 15,000 से अधिक व्हाइट लेबल एटीएम शामिल हैं।

हालांकि एटीम बंद करने के पीछे उसके हार्डवेयर और साफ्टवेयर को उन्नत बनाने का कारण भी बताया गया है। यानि कि एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन नियमों के गैर-व्यवहारिक नियमों और कैश लोडिंग और कैश मैनेजमेंट के बदले हुए मानकों को लादने के कारण एटीएम मशीनों को बंद करना पड़ेगा।

आंकड़ों के मुताबिक जिन एटीएम मशीनों में सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना है, उनमें एक लाख करीब ऑफ साइट एटीएम और करीब 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम मशीनें हैं। एटीएम संचालकों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (कैटमी) के अनुसार एटीएम मशीनों के बंद होने पर एक बार फिर एटीएम के बाहर नोटबंदी के तुरंत बाद जैसी लोगों की लंबी लाइन देखने को मिल सकती है। 

सामान्य तौर पर ग्रामीण और कस्बाई इलाके के एटीएम में कैश की कमी और अनियमितता रहती है। यही नहीं सरकार के प्रधानमंत्री जनधन योजना के लाखों लाभार्थी भी इस संभावित संकट से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि सरकार ने जनधन योजना के लाभार्थियों को एटीएम से योजना की सब्सिडी राशि निकालने की छूट दे रखी है। इससे इन खाता धारकों की परेशानी बढ़ेगी। बताया जा रहा है कि सर्विस प्रोवाइडर और बैंकों के बीच एटीएम की सर्विस के लिए जो करार किया गया था, वह पुराना हो गया है। 

कैटमी के अनुसार एटीएम मैनेजमेंट सर्विस प्रोवाइडर नोटबंदी के बाद लगातार घाटे में हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद सर्विस प्रोवाइडरों को ब्राउन लेवल एटीएम और व्हाइट लेबल एटीएम में बदलाव करना पड़ा था, जिससे वे बहुत ही आर्थिक दबाव में आ चुके हैं।

 सर्विस प्रोवाइडर पहले से ही ऊंची लागत को लेकर परेशान हैं। अब ऐसे में एटीएम सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने की स्थिति में और भी परेशानी बढ़ सकती है। इसका अर्थ यही हुआ कि वे घटे में और अधिक पैसा लगाने के बजाय एटीएम बंद करना ही पसंद करेंगे। कुल मिलाकर नुकसान और परेशानी हर हाल में आम नागरिक को ही उठाना पड़ेगा।