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दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज कहीं बन न जाये अय्याशियों और हंगामे का अड्डा।

दिल्ली में बना सिग्नेचर ब्रिज अनूठे निर्माण का एक बेहतरीन नमूना है, लेकिन इसके निर्माण से लेकर उद्घाटन तक के दौरान जो कुछ हुआ वह शर्मसार करने जैसा था। अब उससे भी अधिक शर्मसार करने की  बात पिछले दिनों ब्रिज पर अश्लीलता फैलाने वाले वीडियो के वायरल होने पर सामने आई।  कुछ लोगों ने ब्रिजी पर कपड़े उतारे और अभद्रता का बेहूदा नमूना प्रदर्शित किया। इसे लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा जागी कि वे कौन लोग हैं— लड़कियां या ट्रांसजेंडर्स?

इस ब्रिज को आम लोगों के लिए खोला गया ताकि सफर आसान हो और लोग भीड़भाड़ और आए दिन लगने वाली जाम से बच सकें। लेकिन यह क्या सफर कितना आसान हुआ कहना मुश्किल है, लेकिन यह आशंका है कि मुसीबतों का अड्डा न बन जाए? 

कारण लोगों को बीच ब्रिज में गाड़ियों को रोककर ज़िंदगी को ख़तरे में डालते हुए सेल्फ़ी लेते हुए देखा जा सकता है। 

इसी सिलसिले में ताज़ा घटना का वह वीडियो भी है, जिसमें कुछ लोग अपने कपड़े उतारकर सिग्नेचर ब्रिज में मस्ती करते हुए दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो के बारे में दो तरह की बातें की जा रही हैं।

पहली ये कि वीडियो में कपड़े उतारने वाली लड़कियां हैं। दूसरी ये कि कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर्स हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ये स्पष्ट नहीं है कि कपड़े उतारने वाले कौन हैं? ये वीडियो कुछ दूरी से बनाए गए हैं।

इसे लेकर तरह—तरह की बातें और ब्रिज पर होने वाली हरकतों को देखते हुए दिल्ली पुलिस भी सक्रिय हो गई हैै। उसने 15 नवंबर को सिग्नेचर ब्रिज पर ट्रांसजेंडर्स के बने वीडियो वायरल होने के बाद सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता फ़ैलाने का केस दर्ज कर लिया है। डीसीपी नॉर्थ ईस्ट अतुल ठाकुर ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करवा दिया है। 

इस बारे में अतुल ठाकुर ने कहा, ''धारा 294 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं की गई है, लेकिन जल्दी ही गिरफ़्तारी की जाएगी। ये दोनों धाराएं सार्वजनिक स्थलों पर अश्लीलता फैलाने पर लगाई जाती हैं।''

अतुल ठाकुर के अनुसार ऐसे मामले में आरोपी की तीन महीने की सज़ा होती है। इस केस पुलिस की तरफ से खुद दर्ज किया गया है।  दिल्ली पुलिस के अनुसार वीडियो में कोई तीन—चार लोग थे, जो सिग्नेचर ब्रिज पर मौजूद थे। फिलहाल हमने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है। घटना की सही तारीख़ और वक़्त क्या है। इसकी जांच की जानी है। 

उल्लेखनीय है कि ऑबसिनिटी यानी अश्लीलता के तहत दर्ज किए गए केस  आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज किए जाते हैं। इस धारा के तहत सजा का प्रावधान है। कोई भी इंसान अगर सार्वजनिक स्थल पर नग्नता करता या करती है, या फिर ऐसा कुछ करता है, जो अश्लील हो तो ये केस दर्ज किया जाता है। हालांकि अश्लीलता क्या है, इसको लेकर  कई मत हैं। इसे समझने की ज़रूरत है। अश्लीलता की परिभाषा वक़्त के साथ बदली भी है। किसी भी सार्वजनिक जगह पर कोई भी ऐसा काम करना जो अश्लील है, वो दंडनीय है।