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अब Whatsapp कर रहा है, फेक न्यूज से निपटने की तैयारी।

बीबीसी द्वारा फेक न्यूज को खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा और इसपर छेड़ी गई बहस के बाद Whatsapp ने भी बड़ी तैयारी की है। इस सिलसिले में उसने शोध के लिए 20 सदस्यों की टीम बनाई है। उसके द्वारा ऐसा तब किया गया, जब पिछले दिनों भारत सरकार ने उसे निर्देश दिया था कि वो झूठी खबरों और कभी-कभी भड़का देने वाले मैसेजेज के खिलाफ उपाय ढूंढे।

इस तरह से Whatsapp नकली और फर्जी खबरों को रोकने की बड़ी तैयारी की घोषणा करते हुए रिसर्चरों की टी में भारत के कई लोगों को जिम्मेदारी सौंपी है। उनका मुख्य काम फर्जी जानकारी फैलने के कारणों की तलाश करना है। तकि वॉट्सऐप को इन झूठी खबरों से लोहा ले सके। उसके बाद इसके लिए उचित कदम उठाने के संदर्भ में तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

फर्जी खबरें रोकने के लिए फिलहाल शोधकर्ताओं की टीम रिसर्च पेपर पर काम करेंगी। इसके लिए तैयार किए गए पेपर पर काम करने के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस के शकुंतला बानाजी और रामनाथ भट्ट एवं बेंगलुरु की मीडिया संस्थान मार्आ के निहल पसंहा का चयन किया गया है। तीनों शोधकर्ता शोधपत्र के मुताबिक इस बात की खोज करेंगे कि वॉट्सऐप पर आए मैसेज पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है? क्या वजह है कि लोग भीड़ बना कर किसी को मार-मार कर उसकी हत्या कर देते हैं? लिखे जाने तक 'वॉट्सऐप लिंचिंग' के चलते 30 लोगों की हत्या हो चुकी है। इन सभी की मौत लोगों को वॉट्सऐप पर फैली अफवाह की वजह से हुई।

साइबर पीस फाउंडेशन के विनीत कुमार और आनंद राजे, और साइबर कैफे एसोसिएशन ऑफ इंडिया  की अध्यक्ष अमृता चौधरी भी टीम के लिए कुछ चुने हुए लोगों में से हैं। यह टीम जिस पेपर पर काम करेंगे वह है। वे 'डिजिटल साक्षरता और उभरते डिजिटल समाजों पर गलतफहमी के प्रभाव।' थीम पर काम करेंगे। इसी तरह से द पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के श्याम सुंदर और सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के पी. एन. वसंती मिलकर  ' देखने का विश्वास: क्या वीडियो मॉडेल नकली समाचार फैलाने में अधिक शक्तिशाली है' नाम के एक शोध पत्र पर काम करेंगे। इसमें इस बात का पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या झूठी खबरें फैलाने का सबसे कारगर तरीका वीडियो है? क्योंकि देखे हुए पर व्यक्ति आसानी से भरोसा कर लेता है।

इसके अतिरिक्त भारत में रोज होने वाले राजनैतिक बयानें पर वॉट्सऐप की भूमिका पर ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की लिपिका कामरा, क्वीन्स मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की फिलिपा विलियम्स साथ मिलकर रिसर्च करेंगे.

अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, इस साल जुलाई में वॉट्सऐप ने इसके लिए रिसर्च पेपर्स मांगे थे।  उसके बाद दुनिया भर से करीब 600 रिसर्चर्स की टीमें सामने आईं। उनमें से ही 20 टीमें बनाई गई हैं। वॉट्सऐप के अनुसार हर टीम को उनकी रिसर्च के लिए हम 50,000 डॉलर देगी।

वॉट्सऐप की लीड रिसर्चर मृणालिनी राव का कहना है,'' वॉट्सऐप अपने यूजर्स की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। वॉट्सऐप के 150 करोड़ मासिक एक्टिव यूजर्स हैं, जिसमें से 20 करोड़ भारत के हैं।''