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अमीर बनते ही भारत से विदेश भाग जाते हैं अमीरजादे

अगर भारत में प्रति व्यक्ति आमदनी की बात करें तो उसमें 522 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। करोड़पतियों की संख्या बढ़ी है। लखपति बनने की बात तो भूली—बिसरी हो गई है। छह अंकों में तो भारतियों को मासिक या वार्षिक वेतन मिलने लगा है। यानी भारत अमीर बन रहा है, लेकिन एक शोध बताता है कि भारतीय अमीरजादे देश छोड़ रहे हैं। 

भारतीयों पर हुई हैरानी करने वाली इंडिया स्पेंड एनालिसिस ऑफ डाटा फ्रॉम द यूनाइटेड नेशन डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स की है। उसके मुताबिक 2017 में करीब 17 मिलियन भारतीय विदेशों में रह रहे थे, जबकि 1990 में केवल 7 मिलियन भारतीय विदेश में रह रहे थे। यानी इस संख्या में 143 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान भारत में प्रति व्यक्ति आय भी 522 फीसदी बढ़ी है, जो 1,134 डॉलर से 7,055 डॉलर पहुंच गई है।

एशियन डेवलेपमेंट बैंक के मुताबिक 2017 में करीब 391,000 ने भारत छोड़ दिया था,जबकि 2011 में यह संख्या 637,000 थी। यानी कि बीते तीन दशकों में (1990 से 2017) भारत ने कुशल और अकुशल प्रवासियों के पलायन को देखा है। कतर में भारतीयों की संख्या 82,669 फीसदी बढ़ी है, जो 2738 से 2.2 मिलियन हो गई। इस वजह से बीते दो सालों में कतर में भारतीय जनसंख्या तीन गुना से अधिक है।

 

ओमान में भारतीयों की संख्या 1990 से 2017 के बीच 688 फीसदी और संयुक्त अरब अमीरात में 622 फीसदी बढ़ी है, वहीं सऊदी अरब और कुवैत में यह संख्या 110 और 78 फीसदी बढ़ गई है। पश्चिम में अधिक उम्र वालो की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में वहां श्रमिकों की मांग पैदा हो रही है। इसका फायदा भारत को मिल सकता है।

इसके अतिरिक्त नीदरलैंड, नार्वे और स्वेडन में भी भारतीयों की संख्या 66, 56 और 42 फीसदी बढ़ी है। इन देशों में सुविधाएं अधिक होने के साथ—साथ सस्ते भी हैं। जैसे जर्मनी में एजुकेशन फ्री है और वहां यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के बाद जॉब की संभावना ज्यादा है। वहां यूपी, बिहार, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों से लोग पलायन कर रहे हैं। वहीं भारत में भी काम करने वाले लोगों की संख्या हर महीने 1.3 मिलियन बढ़ रही है।