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भोजेश्वर मंदिर - यहां है विश्व का सबसे विशाल और प्राचीन शिवलिंग

हमारे देश में बहुत से मंदिर हैं। प्रत्येक मंदिर का अपना एक अलग महत्त्व है। आज हम अपने ही देश के एक ऐसे मंदिर के बारे में आपको जानकारी दे रहें हैं। जहां विश्व का सबसे बड़ा और विशाल शिवलिंग है। ख़ास बात यह है की यह शिवलिंग एक ही पत्थर से निर्मित किया गया है। इस मंदिर की अपनी बहुत सी विशेषताएं हैं। यह भारतीय वास्तुकला का एक बेहतरीन उदहारण है।

प्रतीकात्मक

 

आपको बता दें की भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है और यह मंदिर भोजपुर शहर में स्थित है, जो की भोपाल से महज 32 किमी की दूरी पर है। इसी शहर से लगती हुई एक पहाड़ी पर एक अधूरा शिव मंदिर है। इसी मंदिर को भोजेश्वर मशिव मंदिर कहा जाता है। माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण परमार राजवंश के महान राजा भोज ने कराया था। इस मंदिर की अपनी कई विशेषताएं हैं। आइये जानते हैं इन विशेषताओं के बारे में।  

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  • इस मंदिर की पहली विशेषता इसका शिवलिंग है। यह शिवलिंग के ही पत्थर को काट कर बनाया गया था। यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग भी है। शिवलिंग की लंबाई 5.5 मीटर है तथा इसका व्यास 7.5 फीट का है। 
  • इस मंदिर की दूसरी विशेषता इसके पीछे कीओर बना ढलान है। इस ढलान का उपयोग मंदिर के निर्माण के लिए बड़े बड़े पत्थरों को धोने के लिए किया गया था। दुनियां में कहीं भी इस प्रकार की तकनीक के का प्रमाण उपलब्ध नहीं होते हैं। 
  • इस मंदिर की एक विशेषता मंदिर का अधूरापन भी है। मंदिर को अधूरा क्यों रखा गया। इसका इतिहास में कोई प्रमाण तो नहीं मिलता लेकिन कहा जाता है की इस मंदिर का निर्माण महज एक रात में ही होना था लेकिन छत बनने के समय सुवह हो गई और इस कारण इस मंदिर की छत नहीं बन सकी। 
  • इस मंदिर की गुम्बदाकार छत भी इसकी एक विशेषता है। आपको बता दें की इस मंदिर का निर्माण इस्लाम के भारत में आगमन से पहले हुआ था। अतः यह माना जाता है की गुम्बद के निर्माण की कला भारत में इस्लाम के आने से पहले मौजूद थी। 
  • 40 फीट की ऊंचाई वाले मंदिर के स्तंभ भी इस मंदिर की एक विशेषता ही हैं। मंदिर की अधूरी छत इन स्तम्भों पर ही टिकी हुई है। इस मंदिर के सामने पश्चिमी दिशा में एक गुफा भी है। इस गुफा में पुरातात्विक महत्त्व की अनेक प्रतिमाएं भी हैं। इस गुफा को पार्वती गुफा के नाम से जाना जाता है।