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त्रियुगीनारायण मंदिर - यहां हुआ था देवी पार्वती ओर महादेव का विवाह

पौराणिक कथाओं में देवी पार्वती ओर महादेव के विवाह के बारे में बताया गया है। शिव महापुराण में इस महाघटना का विस्तृत वर्णन किया है। यह कथा पढ़कर किसी के मन में भी यह प्रश्न उठना सहज ही है कि यदि यह विवाह था तो आखिर किस स्थान पर इस विवाह को संपन्न कराया गया था। आज हम आपको इसी के बारे में ही जानकारी दे रहें हैं। आपको बता दें कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग नामक जिले में वह स्थान है जहां देवी पार्वती तथा भगवान शिव का विवाह संपन्न हुआ था। रुद्रप्रयाग जिले में त्रियुगीनारायण मंदिर ही वह स्थान बताया जाता है।

प्रतीकात्मक

 

जहां पर देवी पार्वती ओर महादेव का विवाह संपन्न हुआ था। जहां पर एक अग्निकुंड भी है। जिसकी अग्नि 12 माह तक जलती रहती है। मान्यता है कि इस अग्नि कुंड के चारों ओर ही देवी पार्वती ओर महादेव ने फेरे लिए थे। इस पावन अग्नि के दर्शन के लिए लोग लाइन में लगे रहते हैं। शिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं तथा विवाहित लोग इस स्थान का दर्शन करने के लिए बहुत लालायित रहते हैं। यह भी मान्यता है कि इस कुंड की भस्म का तिलक लगाने से सौभाग्य प्राप्त होता है। 

प्रतीकात्मक

 

बताया जाता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से इसी स्थान पर स्थित है। इस स्थान के बारे में लोगों की मान्यता यह भी है कि इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने वामन देवता का रूप धारण किया था। पौराणिक कथाएं यह भी बताती हैं कि इस स्थान पर ही देवी पार्वती तथा भगवान शिव ने एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था। इस पवित्र स्थान पर ही आदि गुरु शंकराचार्य भी आये थे ओर उन्होंने यहां पर महादेव तथा देवी पार्वती की प्राचीन प्रतिमाओं को स्थापित कराया था।