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नागलोक तक जाता है यह कुआं, महादेव ने किया था स्थापित

पहले के समय में पानी का बड़ा स्त्रोत कुएं ही थे। हमारे देश में स्थान स्थान पर कुएं बने हुए थे। लोग कुओं से ही पानी भरा करते थे और उस पानी को अलग अलग कार्यों में उपयोग करते थे। समय के साथ नई तकनीक सामने आई और कुओं का प्रयोग कम होने लगा। बाद में कुओं को या तो बंद कर डाला गया या फिर वे सूख गए। लेकिन आज हम आपको जिस कुएं के बारे में बता रहें हैं। उसकी चर्चा दूर दूर तक और यह कुआं दुनियाभर में प्रसिद्ध भी है। 

प्रतीकात्मक

 

मिलता है सभी पापों से छुटकारा - 

जिस कुएं के बारे में आज हम आपको बता रहें हैं। उस स्थान का नाम "कारकोटक नाग तीर्थ" है। यह स्थान काशी के नवापुरा में स्थित है। इस कुएं के बारे में काफी मान्यताएं पुराने समय से हैं। लोगों का मानना है की यह कुआं इतना अधिक गहरा है की इसकी गहराई का पता आज तक नहीं चल पाया है। दूसरी और स्थानीय लोगों का कहना है की यह कुआं नागलोक तक जाता है। लोगों में मान्यता यह भी है की इस कुएं के दर्शन मात्र से सर्प दंश के भय से छुटकारा मिल जाता है। लोगों का कहना यह भी है की इस कुएं के जल से स्नान करने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है तथा कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिल जाती है।  

प्रतीकात्मक

 

इस स्थान पर नागपंचमी को मेला भी लगता है तथा पूजन आदि कार्य किये जाते हैं। छोटे सांपो को यहां छोटे गुरु तथा बड़े सांपो को बड़े गुरु कहा जाता है। जो सांप महादेव के गले में सजते हैं वे बड़े गुरु तथा जो उनके पावों का श्रृंगार बनते हैं वे छोटे गुरु कहलाते हैं। पौराणिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है की इस कुएं की स्थापना स्वयं महादेव ने की थी। यह भी बताया जाता है की इसी स्थान पर महर्षि पतंजलि ने महर्षि पाणिनी के महाकाव्य की रचना की थी।