+

120 वर्ष से निर्माणाधीन यह मंदिर, देता है ताजमहल को मात

हमारे देश में बड़ी संख्या में मंदिर हैं। इसके अलावा अन्य धर्म और सम्प्रदायों के भी धार्मिक स्थल हमारे देश में मौजूद हैं। इनमें से कुछ धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो कला के उत्कृष्ट नमूने हैं। सुंदर और कलात्मक इमारतों की बात की जाए तो हमारे देश में सबसे पहले ताजमहल का नाम आता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे धार्मिक स्थल के बारे में यहां बता रहें हैं। जो अपनी कलात्मकता तथा सुंदरता में ताजमहल को भी मात देता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस धार्मिक स्थल निर्माण पिछले 120 वर्ष से लगातार चल रहा है। इस स्थल की ईमारत को देख कर आप हैरान रह जाते हैं। यह ईमारत ख़ूबसूरती तथा कारागिरी का उत्कृष्ट नमूना है। आइये अब आपको विस्तार से बताते हैं इस ईमारत के बारे में। 

संत सेठ शिव दयाल जी समाधि स्थल है यह मंदिर - 

प्रतीकात्मक

इस मंदिर को "राधा स्वामी मंदिर" के नाम से जाना जाता है। यह उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में दयाल बाग़ क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर वास्तव में राधा स्वामी संप्रदाय के प्रवर्तक "सेठ शिव दयाल जी" का समाधि स्थल भी है। इस मत के सत्संगी दुनियां के बहुत से देशों में निवास करते हैं। पूरण धनी सेठ शिव दयाल जी का जन्म 24 अगस्त 1818 को जन्माष्टमी के दिन हुआ था। सेठ शिव दयाल जी ने 1861 में वसंत पंचमी के दिन राधा स्वामी मत की नींव रखी थी। 15 जून 1878 को इस मत के प्रथम गुरु सेठ शिव दयाल जी ने समाधि ले ली थी। 

राधा स्वामी मंदिर की प्रमुख विशेषताएं - 

प्रतीकात्मक

इस मंदिर का ऊपरी कलश सोने से निर्मित किया हुआ है। इस मंदिर को पिछली चार पीढ़ी से करीब 200 मजदूर बनाने में लगे हुए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की इस मंदिर का निर्माण कार्य पिछले 120 वर्ष से लगातार चल रहा है। इस मंदिर निर्माण के दौरान किसी भी मजदूर से जबरन कार्य नहीं कराया गया है। इस मंदिर का निर्माण करने में किसी भी प्रकार की सरकारी या गैर सरकारी मदद नहीं ली गई है। 52 कुओं की नींव पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर का नक्शा आज से 150 वर्ष पहले इटली की एक कंपनी ने बनाया था। इस नक़्शे में यह तक तय किया गया था कि किस स्थान पर कौन सा पेड़ लगेगा। मंदिर के मुख्य दरवाजे पर एक कुआं भी है जिसका जल आपको प्रसाद के रूप में दिया जाता है। राधा स्वामी मत के सत्संगी लोगों का कहना है कि यह कुआं अत्यंत प्राचीन है। पहले इस कुएं का पानी कड़वा था लेकिन सेठ शिव दयाल की कृपा से इस कुएं का जल मीठा हो गया था। तब से आज तक इस कुएं का जल मीठा ही है। आज भी जो लोग इस मंदिर में जाते हैं वे इस कुएं का जल प्रसाद रूप में जरूर ग्रहण करते हैं।