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सरकारी एजेंसी ने टॉयलेट पानी को बेचकर कमाये 78 करोड़ रुपये

टॉयलेट के पानी के उपयोग के बारे में यदि आप किसी से पूछेंगे तो हर कोई इसको बेकार पानी ही बताएगा। असल में होता भी यही  टॉयलेट का पानी बेकार हो जाता है और उसका कोई अन्य उपयोग हो भी नहीं सकता है। लेकिन इस बात को जानकर आप हैरान हो जाएंगे की भारत की एक सरकारी एजेंसी ने इसी टॉयलेट के पानी को बेचकर 78 करोड़ रुपया कमा लिया है। आपको भले ही इस बात का यकीन न हो लेकिन यह सच बात है। इस बात की पुष्टि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की। उन्होंने बताया की "जिस टॉयलेट वॉटर को बेकार समझ कर फेंक दिया जाता था असल में उससे अच्छी कमाई की जा सकती है।

" आपको बता दें की इस टॉयलेट वॉटर से बसें चलाई जा रही हैं। इस बारे में नितिन गडकरी ने जानकारी देते हुए बताया की "वर्तमान में नागपुर में वैकल्पिक ईंधन  को लेकर कुछ प्रयोग किये जा रहें हैं। यहां पर टॉयलेट वॉटर से बायो सीएनजी निकाली जा रही है और उससे एसी बसें चलाई जा रही हैं।" इसके अलावा नितिन गडकरी ने चल रहे कई अन्य प्रयोगों के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया की " मुंबई, पुणे और गुवाहटी में कोयले से बसें चलाने का प्रयोग किया जा रहा है। कोयले से मीथेन गैस निकाल कर बसें चलायी जा रही हैं।" गडकरी ने बताया की डीजल 62 रुपये लीटर है जबकि मीथेन की कीमत महज 16 रुपये ही पड़ती है।

नितिन गडकरी ने बताया की अभी हम विमानन उद्योग में भी क्रांति लाने के प्रयोग कर रहें हैं। इस बारे में उन्होंने बताया की विमानों को बायो फ्यूल की मदद से उड़ाने के प्रयोग किये जा रहें हैं। देहरादून से दिल्ली के बीच एक बाद हवाई जहाज बायो फ्यूल की मदद से उड़ाया भी जा चुका है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो विमानन कंपनियों के घाटे को बड़े स्तर पर कम किया जा सकता है। इस प्रकार से देखा जाए तो वैकल्पिक ऊर्जा के ये प्रयोग भारत के भविष्य के लिए बहुत अच्छे हैं। इनसे न सिर्फ महगाई कम होगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा सकारात्मक असर पड़ेगा।