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प्रभू श्री राम से संबंधित है यह स्थान, यहां रुकना मतलब है मौत

धनुषकोटि वास्तव में एक गांव है। यह भारत और श्री लंका के मध्य एक स्थलीय सीमा है। सीधे सीधे यह भी कहा जा सकता है की भारत के इस स्थान से आपको श्री लंका साफ़ साफ़ दिखाई पड़ जाता है। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी की भारत के इस स्थान का नाम भुतहे शहरों की लिस्ट में भी है। इस स्थान पर कोई शाम के समय के बाद नहीं रहता। सभी लोग शाम के समय से ही इस स्थान से जाने लगते हैं। रात के समय यह स्थान न सिर्फ सुनसान हो जाता है बल्कि डरावना भी लगने लगता है। लोगों का कहना है की शाम से पहले ही धनुषकोटि से रामेश्वरम वापस आ जाता चाहिए क्यों की वापसी का सारा रास्ता डरावना तथा रहस्यमय भी है। वाबजूद इसके यहां पर्यटन बढ़ रहा है। लोह काफी संख्या में इस भुताह गांव को देखने आते हैं। भारतीय नौ सेना ने इस स्थान पर अपनी एक चौकी भी बना रखी है।

चक्रवात से बर्बाद हुआ था धनुषकोटि - 

आपको बता दें की 1964 में चक्रवात से धनुषकोटि एक तीर्थ स्थान तथा अच्छे पर्यटक स्थान के लिए प्रसिद्ध था। लेकिन आज यहां सिर्फ खंडर ही देखने को मिलते हैं। जो बीते समय की रंगीनियों की कहने को बयां करते हैं। धनुषकोटि के लिए पहले एक रेल लाइन भी थी, जो चक्रवात में नष्ट हो गई थी। 

क्या है पौराणिक मान्यता - 

माना जाता है की रावण के भाई तथा श्रीराम के सहयोगी रहे विभीषण के अनुरोध पर श्रीराम ने अपने बनाये रामसेतू को अपने धनुष के एक सिरे से तोड़ डाला था। श्रीराम ने यह कार्य इस भूमि से ही किया था अतः तब से इस भूमि को धनुषकोटि कहा जाता है। एक मान्यता यह भी है की श्रीराम ने अपने धनुष के एक सिरे से, इस स्थान को रामसेतू के लिए चिंहित किया था। एक और मान्यता है जो इस स्थान के महत्त्व को बताती है। अब चूंकि रावण एक ब्राह्मण था तो मान्यता यह है की रावण की मृत्यु के बाद खुद को ब्रह्म हत्या के पाप से बचाने के लिए श्रीराम ने इसी धनुषकोटि नामक स्थान पर यज्ञ किया था। 

भुताह स्थान के रूप में है प्रसिद्ध - 

धनुषकोटि का संबंध भले ही श्रीराम से जुड़ा हुआ हो लेकिन इसको एक भुताह स्थान भी कहा जाता है। शाम के बाद इस स्थान पर डरावना माहौल बनने लगता है। रात में यहां कोई नहीं रुकता है। कुछ लोगों का कहना है की सी स्थान पर आत्माओं का आभास होता है। कुछ मानते हैं की इस स्थान पर भटकती आत्माएं वास करती है। अब यहां भूत प्रेत हैं या नहीं इस बात के बारे में तो कोई सबूत नहीं दे सकता लेकिन कुल मिलाकर इस स्थान के भुताह होने की बात से यहां के पर्यटन में काफी ज्यादा बढ़ावा हुआ है।