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गुरु पर्व पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, खुलेगा करतारपुर कॉरिडोर

प्रतीकात्मक

इस वर्ष गुरु पर्व यानि गुरु नानक देव के 550 वें प्रकाशोत्सव वर्ष पर केंद्र सरकार ने अहम् फैसला लिया। इस फैसले से सारे सिक्ख समुदाय में ख़ुशी की लहार दौड़ गई है। असल में सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। आपको बता दें की इसकी मांग सिक्ख समुदाय में लम्बे समय से चली आ रही थी।  अभी तक सिक्ख श्रद्धालु पंजाब के गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक बार्डर आउटपोस्ट से श्री करतारपुर साहिब का दर्शन दूरबीन से करते आ रहें हैं। अब केंद्र सरकार ने गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नाक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बारे में जताया कि यह प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा तथा इसका पूरा खर्च भी सरकार द्वारा ही उठाया जायेगा। 

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सुषमा स्वराज को कैप्टन अमरिंदर का पत्र -  

हालही में कैप्टन अमरिंदर ने देश कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कैप्टन अमरिंदर ने जिक्र किया था कि श्री करतारपुर साहिब सिक्खों की आस्था से जुड़ा स्थान है इसलिए पाकिस्तान से भी इसका मार्ग खुलवाने के लिए बात कि जाए। पाकिस्तान कि और से भी इसके लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। कुछ ही दिन पहले जब सिद्धू पाक प्रधानमंत्री बने इमरान खान के शपथ समारोह में गए थे तो वहां से आकर उन्होंने बताया था कि "पाक सेनाध्यक्ष ने भी ने मुझ से कहा था की पाकिस्तान भी श्री करतारपुर साहिब के लिए मार्ग खोलने का विचार बना रहा है।"

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यह है श्री करतारपुर साहिब का महत्व - 

असल में श्री करतारपुर साहिब को दुनियां का पहला गुरुद्वारा माना जाता है। इस गुरूद्वारे की नींव स्वयं गुरु नानक देव ने रखी थी। यहीं पर नानक जी ने लंगर की प्रथा की शुरुआत की थी। गुरु नानक देव अपने जीवन के 15 वर्ष इसी धरती पर व्यतीत किये थे। इसके अलावा इसी स्थान पर ही उन्होंने अंतिम सांस भी ली थी। 1947 में इस गुरूद्वारे का निर्माण पटियाला स्टेट के महाराजा भूपेंद्र सिंह ने शुरू कराया था लेकिन जब इसका निर्माण कार्य चल रहा था तब ही भारत का बटवारा हो गया था।