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अब होगी स्पेस टेक्नोलॉजी से गंगा की सफाई

गंगा नदी की सफाई के लिए कई तरीके अपनाए गए, लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं आए। आने वाले दिनों में वैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है, जो नदियों की सफाई अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कारगर साबित हो सकता है। नदियों की सफाई के लिए सबसे जरूरी होता है उसमें फैली गंदगी से संबंधित डेटा का पता लगाना। यानी गंदगी किस तरह की है? उसका फैलाव कितनी तेजी से होता है? उसके पानी में घुलने और तैरने की क्षमता कैसी है? इत्यादी प्रश्नों के जवाब मिलने पर ही गंदगी को नदी से निकालने के उपाय किए जा सकते हैं। इस संबंध में नई स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए नदियों का बेहतर डाटा मिल सकेगा। उसके बाद इसके जरिए प्रोजेक्ट की योजना बनाने और उसकी कंट्रोलिंग में भी मदद मिलेगी।

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के लिए इसी स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए नदियों का बेहतर डाटा हासिल किया जा सकेगा। इस तरह प्राप्त डेटा की मदद से प्रोजेक्ट की योजना बनाने और उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस की मदद लेने के अलावा सर्वे जनरल ऑफ इंडिया के डाटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टेक्नोलॉजी के जरिए गंगा को साफ करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त इसरो की मदद से जीयो—स्पेशियल और रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नदियों की वॉटर क्वॉलिटी जांचने के लिए किया जाएगा।

मिश्रा ने कहा कि इस तरह के डाटा से नदियों की परियोजनाओं को बेहतर तरीके से मॉनिटर करने में मदद मिलेगी और इससे अच्छी योजनाएं भी बनाई जा सकेंगी। उन्होंने यह  जानकारी जी—गवर्नेंस आॅफ नमानी गंगा प्रोग्राम थ्राउट जीओ—स्पशियल टेक्नोलॉजी नाम के प्रोग्राम में दी।