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‘सफर’ का मज़ा लेना है तो जरूर जाइये शिमला की इस ‘टॉय ट्रेन’ में

कहते हैं कि "जो मज़ा सफर में है, वो मंज़िल में कहाँ". इसीलिए किसी ने एक कब्र पर लिखा था कि "मंज़िल तो मेरी यही थी, बस ज़िन्दगी गुज़र गयी यहाँ तक आते आते।" ऐसी ही अन्य कई कहावतें हैं जिनमें 'सफ़र' को 'मंज़िल' से ज्यादा महत्व दिया गया है। आप कभी अपने दोस्तों या फैमिली के साथ कहीं जाते होंगे तो आपको सफर में खूब मज़ा आता होगा। और अगर सफर किसी खूबसूरत और रोचक जगह में हो तो सफ़र के वो खूबसूरत पल पूरी ज़िंदगी में मुस्कराहट बिखेर देते हैं।

 ऐसे ही कुछ रोचक सफर में से एक है हरियाणा के कालका से हिमांचल के शिमला का सफर। वैसे तो शिमला देश के सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। लेकिन फिर भी कालका से शिमला का ये सफर खूबसूरत और रोचक तब है जब आप ये सफर "कालका-शिमला टॉय ट्रेन" से कर रहे हों। कालका-शिमला टॉय ट्रेन जब शिमला के बर्फीले पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती हुयी कालका पहुँचाती है तो ये ट्रेन धरती पर 'जन्नत की सैर' करा देती है। ये ट्रेन अनेक पहाड़ी गांवों, हरे भरे जंगलों, रोचक सुरंगों तथा खूबसूरत दृश्य प्रदान करने वाले पुलों से होकर जाती है। जो सफर करने वालों का मन मोह लेती है। यह रेलवे 2 फिट 6 इंच चौड़ी है। जो कुल 96 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 18रेलवे स्टेशन से होकर गुजरती है।

'कालका-शिमला टॉय ट्रेन' का निर्माण अंग्रेज़ इंजीनीयर 'एच. एस. हैरिंग्टन' और उनकी टीम ने किया था। अंग्रेज़ों के दौरान भारत की गर्मियों की राजधानी शिमला थी। इसीलिए भारत के बाकि रेलवे हिस्सों को ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला से जोड़ने के लिए 1898 में इस रेलवे का निर्माण किया गया। इस रेलवे मार्ग के साथ 107 सुरंग तथा 864 पुल भी बनाये गए। जिनसे गुजरते वक़्त पहाड़ों के नाटकीय दृश्य देखने को मिलते हैं।

साल 2007 में हिमांचल प्रदेश सरकार ने इस रेलवे को 'Heritage Property' में शामिल किया। जिसके बाद सितम्बर 2007 में UNESCO की टीम ने एक सप्ताह तक इस रेलवे की यात्रा की। ताकि वह देख सकें कि यह रेलवे, विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल होने के लायक है या नहीं। अंततः 8 जुलाई 2008 को UNESCO ने कालका-शिमला रेलवे को "विश्व धरोहर स्थल" घोषित कर दिया। इससे पहले दार्जिलिंग हिमालयी रेलवे और नीलगिरी माउंटेन रेलवे भी विश्व धरोहर स्थलों में शामिल थे।

तो अगर आपको घूमने का शौक है तो आप एक बार इस टॉय ट्रेन से सफर जरूर करें। इससे आप अपनी ट्रिप का भरपूर आनंद और पहाड़ी इलाकों का खूबसूरत अनुभव ले सकेंगे।