+

कैंसर रोगियों के लिए संजीवनी है काला चावल, जानें प्रयोग का तरीका

चावल भारत में खूब खाये जाते हैं। हमारे देश के बहुत लोग चावलों को पसंद करते हैं। हमारे घर में कोई त्यौहार हो या कोई उत्सव चावल खाने की शोभा जरूर बढ़ाते नजर आते हैं। लेकिन आपने आज तक सिर्फ सफ़ेद चावल का ही सेवन किया होगा। आज हम आपको काले चावल के बारे में जानकारी दे रहें हैं। काला चावल हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी तथा लाभदायक होता है। वर्तमान में काला चावल भारत में एक औषधी के रूप में उभर रहा है। इसको ब्लैक राइस भी कहा जाता है। हमारे देश में यह काफी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। कई रिसर्च में यह सावित हुआ है की कैंसर जैसी बिमारी के लिए काला चावल बहुत लाभकारी होता है। कई डॉक्टर भी काले चावल के सेवन की सलाह देते हैं। 

प्रतीकात्मक

 

काला चावल आम चावलों जैसा ही होता है बस इसका रंग काला होता है। हमारे देश में काला चावल करीब 500 रुपये किलों बिकता है। आपको बता दें की इस चावल की खेती सबसे पहले चीन में प्रारंभ हुई थी लेकिन अब भारत में भी यह काफी स्थान पर उगाया जाने लगा है। इस चावल में बड़ी मात्रा में एंटी आक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसके सेवन से आपका शरीर डिटॉक्स हो जाता है तथा सेहत संबंधी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं। काले चावल के सेवन को कैंसर रोगियों के लिए बहुत अच्छा माना गया है। इसमें विटामिन E, B, मैग्नीशियम, जिंक तथा आयरन की काफी बड़ी मात्रा होती है।

प्रतीकात्मक

 

भारत में काले चावल की खेती सबसे पहले असम में उपेंद्र रावा ने 2011 में शुरू की थी। उपेंद्र को राज्य के कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी जानकारी मिली थी। उपेंद्र का काले चावल की खेती का प्रयास सफल रहा। इसके बाद में आसपास के करीब 200 लोगों ने काले चावल की खेती करना शुरू कर दिया था। इसके बाद काले चावलों की खेती मणिपुर में होना प्रारंभ हुई तथा अब तक पूरे नार्थ ईस्ट में पॉपुलर हो चुकी है।