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शौचालय के मामले में सचेत रहें महिलाएं

अपने देश में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है कि महिलाओं के लिए इसकी वजह से काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। सरकार लाखों शौचालय बनाने का डंका जरूर बजा रही है, लेकिन सफाई के मामले में अभी मंजिल काफी दूर है।

हाइवे के रेस्टोरेंट से लेकर सार्वजनिक स्थानों बने सभी शौचालयों की स्थिति कमोवेश ऐसी ही है। कहीं टॉयलेट की सीट पर मल—मूत्र बिखरा रहता है, तो कहीं रेस्टोरेंट खाने की जगह इसकी बदवू फैली रहती है। ऐसे में अधिकतर महिलाएं उनमें जाने के बजाया घर आकर फारिग होती हैं।

ऐसे गंदे शौचालयों में जाने पर इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। अधिकत शौचालयों की सीटें खूद साफ करने की जरूरत होती है। कमोड वाले शौचालय की तो हालत और भी खराब रहती है। इस बारे में डॉक्टर बताते हैं कि गंदे शौचालय खासतौर से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह है। गंदे शौचालय के इस्तेमाल, पर्याप्त पानी नहीं पीना या देर तक पेशाब को रोक कर रखने महिलाओं के मूत्र प्रणाली में संक्रमण का खतरा पैदा करता है। इस समस्या का सामना करीब अधिकतर महिलाएं करती हैं। 

उपाया: महिलाओँ के स्वास्थ्य की जरूरतों को ध्यान में रख कर कई कंपनियों ने ऐसी कुछ चीजें बनाई हैं, जिनके इस्तेमाल से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। यहां कि  कुछ स्टार्टअप कंपनियों ने भी इस दिशा में पहल की है। जिसमें खास किस्म का कार्डबोर्ड और स्प्रे है, जिनसे सीट को साफ और कीटाणुमुक्त किया जा सकता है। 

पिछले दिनों महात्मा गांधी इंटरनेशनल सैनिटेशन कंनवेंशन में यह मुद्दा छाया रहा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंटोनियो गुटेरेस कई मंत्रियों और विशेषज्ञों के साथ शामिल हुए थे।

साफ सफाई की कमी भारत और दूसरे विकासशील देशों के लिए अब भी एक बड़ी समस्या है। हालांकि मोदी सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। सरकार का दावा है कि 2014 में जहां 55 करोड़ लोग खुले में शौच कर रहे थे, वहीं अब यह तादाद घट कर 15 करोड़ पर आ गई है। फिर भी शौचालयों की स्थिति में अभी भी व्यापक सुधार नहीं हुआ है। दिल्ली में ही करीब 1.9 करोड़ आबादी की तुलना में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या महज कुछ सौ ही है। एस सर्वे में पाया गया कि उनमें से 70 फीसदी शौचालय गंदे थे और उनमें पानी की सप्लाई तक ठीक से नहीं थी।