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बच्चों की शामत बनकर आता है निमोनिया

निमोनिया एक लाइलाज बीमारी नहीं है, फिर भी यह मौत का कारण बनता रहता है। आए दिन इसकी चपेट में बच्चे आ जाते हैं और उनकी मौत तक हो जाती है। एक वैश्विक अध्ययन के तहत चेतावनी दी गई कि भारत में 2030 तक 17लाख से अधिक बच्चों की मौत निमोनिया से हो सकती है। जबकि इसका उपचार आसानी से संभव है।  ब्रिटेन की गैर सरकारी संस्था ‘सेव द चिल्ड्रेन’ ने इस बीमारी के घातक रूप लेने की आशंका जताई गई है। विश्व निमोनिया दिवस के मौके पर उसके द्वारा 12 नवंबर को एक रिपोर्ट जारी की गई है।

अध्ययन में बीमारी को गंभीरता से लेते हुए इसके प्रति रक्षात्मक रवैया अपनाने और सचेत रहने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार 1.1 करोड़ पांच साल से कम आयु के बच्चों की 2030 तक दुनियाभर में मौत हो सकती है। इसी तरह से 17.3 लाख बच्चों की नाइजीरिया में इस बीमारी से मौत की आशंका है। पाकिस्तान में 7.06 लाख बच्चे  और 6.35 लाख बच्चे कांगो में मर सकते हैं। हालांकि 40 लाख से अधिक मौतें टीकाकरण, उपचार और पोषण की दरों में सुधार से टाली जा सकती हैं।

वर्ष 2016 में हुई 8.8 लाख बच्चों की मौत इसी बीमारी से हुई थी। अधिकतर की उम्र दो वर्ष से कम थी।

इस तरह से देखें तो पाएंगे कि दुनियाभर में यह बच्चों के लिए सबसे बड़ी जानलेवा संक्रामक बीमारी बन चुका है। यानी कि मलेरिया, दस्त एवं खसरा को मिलाकर जितनी मौतें होती हैं, उससे कहीं अधिक बच्चों की मौतें अकेले इस बीमारी से हो जाती हैं।

बचाई जा सकत है शिशुओं की जान

निमोनिया से बचाव के कई उपाय किए गए हैं, जिनसे शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।

टीकाकरण: 6.10 लाख जिंदगियों में 90 फीसदी पांच साल से कम आयु के बच्चों तक टीका पहुंचाकर।  

एंटीबायोटिक: 19 लाख बच्चों को सस्ती एंटीबायोटिक दवाओं के वितरण से बचाया जा सकता है।

पोषक तत्व: 25 लाख बच्चों को पर्याप्त पोषक तत्व उपलब्ध कराकर मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त 10वें विश्व निमोनिया दिवस से पहले इंटरनैशनल वैक्सीन ऐक्सैस सेंटर (आईवीएसी), जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल आफ पब्लिक हैल्थ द्वारा निमोनिया एंड डायरिया प्रोग्रैस रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में निमोनिया और डायरिया से मुकाबला करने की दिशा में उन 15 देशों की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है जहां इन बीमारियों से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं।

इस रिपोर्ट में यह विश्लेषण किया गया है कि निमोनिया व डायरिया (दस्त) की रोकथाम, इनसे सुरक्षा व इनके उपचार के लिए विभिन्न देश 10 प्रमुख हस्तक्षेप कितने प्रभावशाली ढंग से कर रहे हैं।