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"दारुल उलूम देवबंद" ने नेल पॉलिश को लेकर जारी किया फ़तवा

 

अपने फतवों के कारण समय समय पर चर्चा में आने वाले इस्लामिक इंस्टिट्यूट ‘दारुल उलूम देवबंद’ अब एक नए फतवे को लेकर फिर से चर्चा में आ गया है। दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती इशरार गौरा का तर्क है कि महिलाओं का नेल पॉलिश लगाना गैर इस्लामिक है। साथ ही उनका कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को अपने नाखूनों पर नेल पॉलिश की जगह मेहंदी का इस्तेमाल करना चाहिए। अपने ऐसे और भी कई फतवों के कारण दारुल उलूम देवबंद पहले भी समय समय पर चर्चा में रहता आया है। नेल पॉलिश के गैर इस्लामिक होने के पीछे दारुल उलूम देवबंद के मुफ़्ती ने कारण दिया है कि नाखून पर लगी नेल पॉलिश की परत की वजह से वज़ू (नमाज से पहले हाथ-पैर धोना) के वक्त नाखून पर पानी नहीं लगता।

  दारुल उलूम देवबंद के मुफ़्ती ने कहा कि अगर इस्लामिक महिलाएं नमाज़ से पहले नेल पॉलिश को साफ़ कर लें तो नेल पॉलिश को लेकर कोई परेशानी नहीं।

इससे पहले किन किन फतवों को लेकर चर्चा में आया था दारुल उलूम देवबंद?

ख़बरों की माने तो पिछले 12 साल में दारुल उलूम देवबंद 1 लाख से अधिक फतवे जारी कर चुका है। लेकिन इनमे से जो मुख्य रूप से चर्चा में रहे थे उनमे से कुछ फतवों पर नज़र डालते हैं-

औरतों का पुरुषों के फुटबॉल मैच को देखना हराम

जनवरी में सऊदी अरब ने एक फ़तवा जारी किया था कि औरतों का पुरुषों का फुटबॉल मैच देखना हराम है। इस फतवे का दारुल उलूम देवबंद ने खूब समर्थन किया था। इस फतवे पर दारुल उलूम देवबंद के मुफ़्ती अथर कासमी का कहना था कि फुटबॉल के खिलाड़ी शॉर्ट निकर पहनते हैं। जिससे महिलाओं कि नज़र उनके घुटनों पर पड़ती है, जिसे देखना इस्लाम में हराम है।

कुरान की आयत का ringtone है हराम

फरवरी में दारुल उलूम देवबंद ने सऊदी अरब के एक और फतवे का समर्थन किया, जिसमे कुरान की आयत को रिंगटोन के रूप में इस्तेमाल करना इस्लाम के विरूद्ध बताया। 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के पत्रकार से बात करते हुए दारुल उलूम के मुफ़्ती ने कहा कि हो सकता है जब घंटी बजे तब फोन उठाने वाला टॉयलेट में हो और ऐसी स्तिथि में कुरान की आयत को गाना या सुनना गैर इस्लामिक है।

बाजार में महिलाओं का गैर मर्दों से चूड़ी पहनना नाज़ायज

फरवरी में ही दारुल उलूम देवबंद ने एक फ़तवा जारी किया था कि मुस्लिम महिलाओं का बाज़ार में गैर मर्दों से चूड़ी पहनना गलत है। फतवे में कहा कि चूड़ी पहनते वक़्त महिला अपना हाथ दुकानदार के हाथ में देती है जबकि इस्लाम में महिलाओं को हर उस इंसान से पर्दा करना चाहिए जिससे खून का रिश्ता ना हो।

सोशल मिडिया पर महिलाओं का फोटो डालना भी गैर इस्लामिक

अक्टूबर में दारुल उलूम ने फ़तवा जारी किया कि सोशल मिडिया पर मुस्लिम औरतों का फोटो डालना भी गलत है।

  इसी तरह के कई जैसे मुस्लिम महिलाओं का आइब्रो, वैक्सिंग और बाल कटवाना, मुस्लिम महिलाओं का चुस्त कपड़े पहनना, सीसीटीवी लगाना और ऐसे ही बहुत से फतवों को लेकर इस्लामिक इंस्टिट्यूट दारुल उलूम देवबंद चर्चा में रहता आया है। आपको बता दें कि ‘इस्लामिक इंस्टिट्यूट दारुल उलूम देवबंद’ को एशिया का सबसे मदरसा माना जाता है।