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मसूद अजहर पर प्रतिबंध के चलते अमेरिका और चीन के बीच टकराव की संभावना

अमेरिका  जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रतिबंधित करने की पूरी कोशिश में जूटा है। इसके लिए अमेरिका ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में एक मसौदा भेजा है। बता दें चीन बार-बार संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध करता रहा है। इसी के चलते संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में यह प्रयास अटक जाने के बाद अमेरिका ने अजहर को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को लेकर सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाया है। इस मसौदे में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की निंदा की गई है और निर्णय किया गया है कि अजहर को संयुक्त राष्ट्र के अल-कायदा एवं इस्लामिक स्टेट प्रतिबंधों की काली सूची में डाला जाए। अब देखना होगा कि इस पर चीन का क्या रुख रहता है। 

प्रतीकात्मक

 

इससे पहले भारत अजहर पर  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए चार बार प्रयास कर चुका है। लेकिन  चीन ने पहले तीन प्रस्तावों पर रोक लगा दी थी और चौथे प्रस्ताव पर भी पर्याप्त सबूत की बात कहते हुए, अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर रोक लगा दी। संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की सूची में जैश-ए-मोहम्मद को पहले ही 2001 में शामिल किया जा चुका है।अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इशारों-इशारों में मसूद  का नाम लिये बिना चीन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह बड़े ही दुःख की बात है कि चीन अपने मुल्क में रह रहे लाखों मुसलमानों का उत्पीड़न करता रहा है वहीं दूसरी ओर वह हिंसक इस्लामी आतंकवादी समूहों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है।’’

प्रतीकात्मक

 

अब दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती। जबकि हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार पाकिस्तान ने चीन से कहा है वह संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक आतंकियों की सूची में मसूद को शामिल करने के लिए लगाई गयी वीटो पावर  को हटा ले।  इससे भारत-पाक सीमा बढ़ते तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। बता दें अब मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान में रुख बतलता जा रहा  है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान खुद चीन से अजहर के वैश्विक आतंकी सूची में शामिल होने पर लगी रोक को हटाने के लिए आग्रह करेगा।