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जेट एयरवेज के पायलट वेतन न मिलने से हुए परेशान, सरकार से मांगी मदद

जेट एयरवेज के पायलट लम्बे समय से सैलरी न मिलने की परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में जेट एयरवेज पायलटों के संघ ने सरकार को चिठ्ठी लिखकर अपने लंबित वेतन को ब्याज के साथ वसूलने में मदद मांगी है। वर्तमान में जेट एयरवेज में करीब 1900 पायलट कार्यरत हैं। 

पायलटों के संघ ने यह चिट्ठी श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार को लिखी है। चिट्ठी में लिखा है कि वेतन के संबंध में जेट प्रबंधन से हमारी की गई अपील का कोई असर नहीं हुआ है। इसके अलावा संगठन के महासचिव के अनुसार, यह स्थिति हमारे सदस्यों में अत्यधिक तनाव और हताशा का कारण बन रही है। 

प्रतीकात्मक

सूट समेत दिलवाएं सैलरी

साथ ही उन्होंने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा कि मासिक ईएमआई, बच्चों के स्कूल और कॉलेजों की फीस, मेडिकल बिल के साथ अन्य कई तरह का भुगतान करना होता है। सरकार को लिखे इस पत्र में पायलटों को वेतन का बकाया सभी भत्तों को मिलाकर ब्याज के साथ एरियर के रूप में भुगतान करवाने की अपील की है। इस पत्र की एक कॉपी डीजीसीए के अध्यक्ष बीएस भुल्लर को भी भेजी गई है।

घाटे में चल रही है जेट एयरवेज

दरअसल घाटे में चल रही जेट एयरवेज जुलाई 2018 से अपने पायलटों, सप्लायरों और लीज कंपनियों को भुगतान नहीं कर पा रही है। जेट एयरवेज पर कर्ज 8,052 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। वहीँ मार्च के अंत तक उसे 1,700 करोड़ रुपए की किस्त चुकानी है। बता दें कि जेट एयरवेज में 24% हिस्सेदारी अबुधाबी के एतिहाद एयरवेज की है और बाकी के शेयर नरेश गोयल के हैं। नरेश गोयल जेट एयरवेज के चेयरमैन भी हैं। 

वहीँ जिन भारतीय बैंकों ने जेट को कर्ज दे रखा है उनका भी कहना है कि जब तक गोयल की हिस्सेदारी 51% से नीचे नहीं लाई जाती, वो जेट को नया कर्ज नहीं देंगे। साथ ही वो यह भी चाहते हैं कि गोयल एयरलाइन के मैनेजमेंट से हट जाएं।