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आखिर हर बार वीटो पावर का इस्तेमाल कर मसूद अज़हर को क्यों बचाता है चीन ?

भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ़्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन की मदद से जैश के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे 13 मार्च को चीन ने अपनी फितरत के तहत वीटो का स्तेमाल करके रद्द कर दिया। पिछले दस सालों में यह चौथा मौका था, जब चीन ने अपने स्वार्थ के चलते आतंकी मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा दिया। 

प्रतीकात्मक

 

यूएन में एक भारतीय राजनयिक बताते हैं कि चीन ने प्रस्ताव को ‘टेक्निकल होल्ड’ पर रख दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित करने का यह प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका 27 फरवरी को लाए थे। इसके बाद समिति  के सदस्यों को प्रस्ताव पर अपनी राय देने या आपत्ति जताने के लिए 10 दिन की समयसीमा दी गई थी। 

इस वजह से चीन कर रहा विरोध

जैश सरगना मसूद अजहर पाकिस्तानी की सेना और आईएसआई का पसंदीदा है, वहीँ एशिया में चीन का सबसे करीबी मित्र पाकिस्तान है। दरअसल चीन को खासकर अपनी महत्वाकांक्षी ओबीओआर प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान की सेना और आईएसआई की जरूरत है। इसी लिए वह मसूद को बार बार बचा रहा है। इसके अलावा भारत की अमेरिका, जापान जैसे बड़े देशों के साथ बढ़ती दोस्ती चीन को पसंद नही है। इसलिए वह मसूद जैसे मुद्दे में भारत का पक्ष नहीं लेता है। साथ ही भारत द्वारा तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को शरण दिए जाने से भी चीन भारत से चिढ़ा हुआ है। 

प्रतीकात्मक

 

चीन इतनी बार कर चुका है आतंकी का सपोर्ट

2009 में भारत ने पहली बार मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद 2016 में भी प्रस्ताव रखा। चीन ने पहले मार्च 2016 और फिर अक्टूबर 2016 में भारत के प्रस्ताव पर वीटो लगागर प्रस्ताव रद्द कर दिया। फिर 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस की मदद से प्रस्ताव रखा लेकिन इस बार भी चीन ने वीटो लगा दिया।