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इटली की महिला ने लावारिस जानवरों को दफनाने के लिए खरीदी जमीन

अपने पालतू जानवरों को खूब प्यार करते हुए और अपने परिवार का हिस्सा बताते हुए तो आपने बहुत से लोगों को देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी लावारिस जानवरों के लिए किसी को संवेदना जताते हुए देखा है? दरअसल बिहार के बोधगया में एक ऐसा कब्रिस्तान है, जहां लावारिस जानवर दफनाए जाते हैं। यह कब्रिस्तान इटली की एड्रियाना फ्रेंटी ने बनाया है। फ्रेंटी ने अपनी जिंदगी लावारिस पशुओं के लिए समर्पित की है। उन्होंने ऐसे पशुओं के खातिर अपने घर को ही अस्पताल का रूप दे दिया है। ऐसे पशुओं को दफनाने के लिए उन्होंने करीब 7200 वर्ग फ़ीट जमीन खरीदकर कब्रिस्तान बनाया है। जहां लावारिस पशुओं को दफनाया जाता है।

प्रतीकात्मक

 

इसलिए बनाया कब्रिस्तान

एड्रियाना फ्रेंटी 1982 में पहली बार इंडिया आई थीं। उन्हें यहां की संस्कृति इतनी पसंद आई कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। एक बार उन्होंने लोगों को नदी किनारे एक कुत्ते का शव फेंकते देखा। यह देखकर उन्हें बहुत दुःख हुआ। इसके बाद उन्होंने जानवरों के इलाज और उन्हें सम्मान पूर्वक दफनाने के लिए जमीन खरीदी। जानवरों का यह कब्रिस्तान 1992 में बनकर तैयार हुआ।

प्रतीकात्मक

 

धार्मिक कर्मकांड के बाद दफनाया जाता है पशुओं का शव

एड्रियाना फ्रेंटी की संस्था के कर्मचारी ग्रामीण और शहरी इलाकों से लावारिस बीमार जानवरों को लाते हैं। यहां उनका इलाज किया जाता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर कुशल चिकित्सक के द्वारा ऑपरेशन भी किया जाता है। लावारिस जानवरों को संस्था में पूरी तरह ठीक होने तक रखा जाता है। फिर उसे उसके इलाके में ले जाकर छोड़ दिया जाता है। इन जानवरों में अधिकतर कुत्ते ही होते हैं। अधिक बीमारी के कारण जो जानवर मर जाता है। उसके शव को धार्मिक कर्मकांड के बाद दफना दिया जाता है।