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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस- केवल 6 देशों में मिलता है महिलाओं को समान अधिकार

8 मार्च को पूरी दुनिया में महिलाओं के दिन के तौर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। लेकिन क्या इस दिन को मनाने से असल दुनिया में कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस बारे में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि विश्व के प्रमुख 187 देशों में आज भी केवल छह ही देश ऐसे हैं, जहां कानूनी तौर पर महिलाओं को पुरुषों की बराबरी का दर्जा प्राप्त है।

प्रतीकात्मक

 

महज 6 देशों में है महिलाओं को सामान अधिकार

दरअसल फरवरी में वर्ल्ड बैंक ने दुनिया के प्रमुख 187 देशों में कुल 35 पैमानों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की। इसमें संपत्ति के अधिकार, नौकरी की सुरक्षा व पेंशन पॉलिसी, विरासत में मिलने में वाली चीजों, शादी संबंधित नियम, यात्रा के दौरान सुरक्षा, निजी सुरक्षा, कमाई आदि आधार पर जब आंकड़े देखे गए तो केवल छह ही ऐसे ही देश ऐसे मिले जहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिले हुए हैं। इन 35 मानदंडों पर खरा उतरने वाले ये छह देश हैं- बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, लैटविया, लक्समबर्ग और स्वीडन। इसके अलावा कुछ देश ऐसे हैं जो जल्द ही इस सूची में शामिल होने वाले हैं, वो आइलैंड, नॉर्वे, फिनलैंड, रवांडा, स्लोवेनिया, न्यूजीलैंड, फीलिपींस, आयरलैंड, निकारगुआ आदि हैं।

लेकिन रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि यह महिलाओं के हक में एक अच्छी बढ़त है, क्योंकि एक दशक पहले ऐसे देशों की संख्या शून्य थी जहां महिलाओं की बराबरी की बात की जाए। खास बात यह है कि यह सभी छह देश यूरोप महाद्वीप के हैं। जबकि एक आंकड़े के अनुसार महिलाओं के अधिकारों पर सबसे ज्यादा बहसें अमेरिका और एशिया महाद्वीप में होती हैं। 

प्रतीकात्मक

 

अफ़्रीकी देशों में महिलाओं की स्थिति ख़राब

अफ्रीका महाद्वीप की बात करें तो अफ्रीकी देशों में आज भी महिलाओं की स्थिति खराब है। लेकिन खास बात यह है कि बीते 10 सालों में अगर किसी महाद्वीप में तेजी से महिलाओं की स्थिति में सुधार आया है तो वे अफ्रीकी देश हैं। एक रिपोर्ट में पता चला है कि बीते 10 सालों में अफ़्रीकी देशों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कुल 71 ऐसे कानून पारित हुए हैं।

भारत में महिलाओं की स्थिति

वहीँ भारत की बात करें तो इस सूची में भारत अभी बेहद नीचे है। भारत अभी कानूनी और भावनात्मक दोनों ही तौर पर महिलाओं के समान अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों से भारत में कानूनी स्तर पर महिलाओं के सामान अधिकारों को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण कानून जरूर पारित किए जा रहे हैं।