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धरती पर तेजी से हो रहा कीटों का अंत, संकट में पड़ सकती है दुनियां

धरती पर करोड़ों जीव-जंतु तथा कीड़े-मकोड़े रहते हैं। प्रत्येक जीव की धरती पर पारिस्थिकी तंत्र बनाये रखने में अहम् भूमिका होती है, फिर चाहे वो कोई छोटे से छोटा कीट हो या बड़े से बड़ा जानवर। अब तक कई जीव धरती से विलुप्त भी हो चुके हैं और कुछ विलुप्त होने की कगार पर हैं। इसको लेकर जीव वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की, जिसकी रिपोर्ट के आंकड़े पारिस्थिकी तंत्र के लिए एक बड़ी विपत्ति है।

प्रतीकात्मक

 

कीटों के अंत के साथ मानव जीवन का भी होगा अंत 

दरअसल वैज्ञानिकों ने पाया कि धरती पर से कीटों की संख्या लगातार कम हो रही है। लगातार कम होने की इस गति से ये माना जा रहा है कि आगामी 100 सालों में ये खत्म हो सकते हैं। यह रिपोर्ट फैंसिसको संचेज और क्रिस एजी वायकुयस नाम के दो वैज्ञानिकों ने पिछले 40 वर्षों में प्रकाशित कीटों के सभी दीर्घकालिक सर्वेक्षणों की समीक्षा कर तैयार की है। रिपोर्ट में पाया गया कि धरती पर मौजूद 40 फीसदी से अधिक कीटों की प्रजातियां अगले कुछ दशकों में समाप्त हो सकती है। जो कि पूरी दुनियां के लिए एक बुरा संकेत है। 

कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी फॉर कन्वर्सेशन बायोलॉजी के प्रेजिडेंट पॉल राल्फ एहरलिच का कहना है कि यह किसी भी जीवविज्ञानी को डरा देने वाली खबर है। अगर सभी कीट मिट जाएंगे तो हम भी मिट जाएंगे। क्योंकि पूरा कृषि क्षेत्र कीटों पर ही निर्भर है। 

प्रतीकात्मक

 

कीटनाशकों से लुप्त हो रहे हैं मित्रकीट

दरअसल फसल के लिए कीटों का होना बेहद जरूरी है। लेकिन किसान कीटों को मारने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी फसल को नुकसान न हो। लेकिन बता दें कि कुछ कीट फसल को नुकसान पहुंचने से बचाते भी हैं, जिन्हें किसानों का मित्रकीट भी कहा जाता है। ये कीट उन कीटों को खाते हैं, जो फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इसीलिए अधिक कीटनाशकों का छिड़काव भी कीटों के लुप्त होने में जिम्मेदार है। 

इसलिए जरूरी हैं धरती पर कीट

कीट धरती पर फूड चेन के लिए भी बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा कीट पौधों के परागण में, मिटटी को उपजाऊ बनाने में, पानी को शुद्ध करने में और कचरे को दोबारा उपयोग लायक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक कीटों की संख्या हर साल 2.5 फीसदी तक कम हो रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार कीटों के पतन में जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण भी बड़ा फैक्टर है।