+

डिजिटल पेमेंट्स के चलते साइबर धोखाधड़ी से कैसे बचाएं अपना बैंक अकाउंट

सरकार ने माना है कि भारत में डिजिटल इंडिया के चलते कई गुना यूजर बढ़ने के साथ-साथ बैंक खतों से धोखाधड़ी भी बढ़ी है। बताया गया है कि डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के जरिए पिछले तीन सालों में बैंक खातों से पैसे निकालने के मामले करीब ढाई गुना बढ़ गए है। 

प्रतीकात्मक

 

साइबर धोखाधड़ी से 2017-18 में के निकाले गए 109.56 करोड़ रुपये

मंगलवार को राज्यसभा में वित्त मंत्री पीयूष गोयल से साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा सवाल किया गया। जिसमें उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के हवाले से बताया कि साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से 2015-16 में बैंक खातों से एक लाख रुपये से अधिक की निकाली गयी राशि 40.20 करोड़ रुपये थी, जो 2017-18 में बढ़कर 109.56 करोड़ रुपये हो गयी। हालांकि डिजिटल लेनदेन की तुलना में धोखाधड़ी से किये गये लेन देन की हिस्सेदारी 2015-16 में 0.0000337 प्रतिशत था, जो 2017-18 में कम होकर 0.0000281 प्रतिशत हो गयी है।

प्रतीकात्मक

 

इन तरीकों से आ पाएगा आपका पैसा वापिस

पीयूष गोयल को सवाल किया गया कि 'क्या बैंकों में धोखाधड़ी और अवैध तरीके से खातों से निकाली गयी राशि का जिम्मेदार खाताधारक ही होगा? तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई के 6 जुलाई 2017 के परिपत्र के मुताबिक अप्राधिकृत ई बैंकिंग लेनदेन में खाताधारक की जिम्मेदारी को निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके तहत बैंक की लापरवाही से हुयी धोखाधड़ी और धोखाधड़ी होने के तीन दिन के भीतर अगर इसकी सूचना बैंक को दे दी जाएगी तो खाताधारक की जिम्मेदारी नहीं होगी। 

इसके अलावा यदि बैंक को चार से सात दिनों के भीतर धोखाधड़ी की सूचना दी जाती है और धोखधड़ी में खाताधारक शामिल न पाया जाये तो ग्राहक की देयता 5 से 25 हजार रुपये तक सीमित होगी। 

वहीँ अगर ग्राहक सात दिन के बाद बैंक को धोखधड़ी की जानकारी देता है तो ग्राहक की देयता बैंक के बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के तहत तय की जाएगी। यदि धोखाधड़ी में ग्राहक शामिल पाया जाता है तो वह स्वयं उत्तरदायी होगा।