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मकर संक्रांति 2019 - जानिये इस पर्व का महत्व और परंपरा

मकर संक्रांति एक भारतीय त्योहार है। इसको देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग परंपरा के हिसाब से लोग मनाते हैं। इस दिन बहुत से स्थानों पर गंगा नदी के किनारे माघ मेला भी लगता है। इसके अलावा कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इस दिन से ही की जाती है। आइये अब आपको बताते हैं की अलग अलग राज्यों में इस पर्व को किस प्रकार से मनाते हैं। यूपी में इस त्योहार को खिड़की के पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सभी लोग चावल तथा दाल की खिचड़ी बनाकर खाते हैं तथा दान भी करते हैं। राजस्थान तथा गुजरात में इस पर्व पर पतंग उत्सव का कार्यक्रम मनाया जाता है तथा सबहि बड़ी संख्या में पतंग उड़ाते हैं। आंध्रप्रदेश में यह पर्व लगातार तीन दिन तक मनाया जाता है। तमिलनाडू में इस त्योहार को पोंगल कहा जाता है और इस दिन सभी लोग चावल, दाल तथा घी में खिचड़ी बनाकर खाते हैं। पश्चिम बंगाल में इस दिन गंगासागर मेले का आयोजन किया जाता है तथा सभी लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं। पंजाब में यह पर्व एक दिन पहले मकर संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। इस प्रकार देश के अलग अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग अलग तरीके के लोग मनाते हैं। 

प्रतीकात्मक
आखिर क्या है मकर संक्रांति पर्व - 

आपको बता दें की जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तब ज्योतिषीय घटना को संक्रांति कहा जाता है। कुल 12 राशियों में चार  मेष, कर्क, तुला, मकर महत्वपूर्ण होती हैं। मकर संक्रांति को किये स्नान तथा दिए गए दान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिण के स्थान पर उत्तर की और जानें लगता है। आपको बता दें जब सूर्य पूर्व से उत्तर की और जाता है तो उसकी किरणें सेहत के लिए लाभदायक तथा मानसिक शांति देने वाली होती है। यह घटना मकर संक्रांति से शुरू हो जाती है अतः इस पर्व का सेहत तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्व है।