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देश में आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य विषय बनाएगी सरकार

2019 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार अपने बचे समय में कई बड़े फैसले लेती दिख रही है। ऐसे में केंद्र सरकार हिंदी विषय के बारे में भी कुछ बड़ा फैसला कर सकती है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय बेसिक शिक्षा में हिंदी को अनिवार्य रूप से पढाए जाने के संबंध में नई नीति बनाने की तयारी में है। जानकारी के मुताबिक पुरे देश में आठवीं तक हिंदी अनिवार्य रूप से पढाई जाएगी। वर्तमान में गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में नहीं रखा गया है।

न्यू एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के लिए कस्तूरीरंगन कमेटी की ओर से बनाई गई रिपोर्ट्स के अनुसार तीन भाषीय फॉर्मूले में हिंदी को आठवीं तक अनिवार्य विषय बनाया जाएगा। साथ ही यूनिफॉर्म सेलेबस में गणित और विज्ञान को भी विशेषता दी जाएगी।

प्रतीकात्मक

बता दें कि वर्तमान में भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम वो गैर हिंदी भाषी राज्य हैं, जहां हिंदी को आठवीं तक अनिवार्य विषय नहीं रखा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सरकार देश भर के एनईपी स्कूलों में भारतीय आधारित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लागू कराने की तैयारी में है। स्थानीय भाषाओँ को भी पांचवी तक पाठ्यक्रम में एक विषय के तौर पर जगह दी जा सकती है। इन भाषाओँ में अवधी, भोजपुरी और मैथिली को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।  इसके चलते एचआरडी मंत्रालय ने रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसके लिए गठित की गई समिति में सदस्यों की नियुक्ति भी हो गयी है।