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फौज की टोपी लगा शहीद बेटे को मां ने दी विदाई, रोने लगे अफसर

गुरुवार को जम्मू कश्मीर के पूंछ में हिमस्खलन के कारण वीरों की भूमि हिमांचल प्रदेश का एक और जवान शहीद हो गया। कांगड़ा के फतेहपुर की सिहाल पंचायत के 34 साल के इस जवान का नाम सपन चौधरी था। सपन अपने साथियों के साथ गस्त पर गए हुए थे। उसी दौरान हिमस्खलन हुआ और लांस नायक सपन चौधरी एक अन्य जवान इसकी चपेट में गए। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बर्फ से निकाला गया। इस घटना में लांस नायक सपन चौधरी देश की रक्षा करते करते शहीद हो गए। शहीद सपन चौधरी का पार्थिव शरीर का जब उनके गांव पंहुचा, तो शहीद की बुज़ुर्ग मां ने अपने बेटे को ऐसी अंतिम विदाई दी कि मां के जज्बे को देखकर सभी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

शहीद की मां ने लगाए भारत मां की जय के नारे

शुक्रवार सुबह जब जवान सपन चौधरी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव सिहाल पहुंचा तो उनकी मां स्वर्णा देवी खुद सड़क पर पहुंच गईं। लगभग 11 बजे शहीद की मां फौजी टोपी पहनकर बेटे की अर्थी के आगे-आगे 1 किलोमीटर पैदल श्मशानघाट तक गईं और बेटे को सैल्यूट मारकर अंतिम विदाई दी।

शहीद की मां के इस हौसले को देखकर साथ आए आर्मी ऑफिसर और जवान भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। साथ ही मां ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए। शहीद के शरीर को बड़े भाई बृजभूषण ने मुखाग्नि दी। शहीद सपन के पिता और भाई भी सेना में थे, लेकिन अब दोनों रिटायर हो चुके हैं।

प्रतीकात्मक

मार्च में चचेरी बहन की है शादी

शहीद सपन चौधरी चचेरी बहन की मार्च में शादी है। अब सपन अपनी बहन की शादी में ही घर आने वाले थे। वे अपने पीछे दो बेटे और पत्नी साथ ही भाई का भरापूरा परिवार छोड़ गए। सपन और उनके बड़े भाई बृजभूषण माता-पिता के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे।

वीरों का गांव है सिहाल पंचायत

वीरों की भूमि के इस गांव से शहादत पाने वाले दूसरे शहीद सैनिक हैं। इससे पूर्व 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए अशोक कुमार का अंतिम संस्कार भी यहीं हुआ था। इस मौके पर लोगों के जहन में अशोक की शहादत की यादें भी ताजा हो गईं।