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बीमार पति को पीठ पर लादने को मजबूर हुई पत्नी

केजीएमयू में बुद्धवार को सुलतानपुर धनहुआ निवासी पन्ना लाल अपनी पत्नी सहित इलाज के लिए आया था। पन्ना लाल को पिछले 2 हफ्ते से सांस लेने में समस्या आ रही है। जिला अस्पताल में खून की उल्टियां आने के बाद पन्ना लाल को केजीएमयू में रेफर कर दिया गया था। लेकिन इस मरीज व्यक्ति के साथ क्या हुआ वह जानकर आप खुद हैरान रह जायेंगे। पन्ना लाल की पत्नी दिन में उसको लेकर करीब 12 बजे अस्पताल में पहुंची लेकिन डाक्टरों ने उसकी हालत देखकर उसको भर्ती करने से इंकार कर दिया। इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई तब कहीं जाकर डाक्टरों ने पन्ना लाल की कुछ जांचें करने के लिए कहा लेकिन इलाज अभी तक नहीं भी शुरू नहीं किया था। एक्सरे, सीटी स्कैन देखने के बाद डाक्टरों ने पन्ना लाल की पत्नी से उसको ओपीडी में दिखाने को कह दिया।

प्रतीकात्मक

मरीज के परिजन पन्ना लाल की हलात का हवाला देकर डाक्टरों के सामने खूब रोये, गिड़गिड़ाए लेकिन डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। खैर अंत में पन्ना लाल की पत्नी को उसको लेकर रैन बसेरे में रात गुजारनी पड़ी। रात में पन्ना लाल की हालत और बिगड़ गई। वहां उसको कई बार खून की उल्टियां आई और वह बेहोश हो गया। अगले दिन भी पन्ना लाल के परिजन उसको ओपीडी में लेकर भटकते रहे। पीआरओ से पन्ना लाल के परिजनों ने बात की तो उसने सही डॉक्टर के पास नहीं भेजा। अस्पताल के कर्मचारी मरीज पन्ना लाल के परिजनों को गुमराह करते रहें। नतीजा यह निकला की उस दिन भी पन्ना लाल का इलाज न हो सका। परिजन ट्रॉमा सेंटर के बाहर इन्तजार करते रहे और पन्ना लाल की हालत बिगड़ती चली गई। वह चलने फिरने से लाचार हो गया। 

प्रतीकात्मक

पन्ना लाल की पत्नी अस्पताल से स्ट्रेचर लेने गई लेकिन वहां उसको स्ट्रेचर देने के लिए मना कर दिया। इसके बाद पन्ना लाल को उसकी पत्नी अपनी पीठ पर लाद कर आधा किमी ओपीडी में पहुंची लेकिन उसको वहां से भी भगा दिया गया। इन सब घटनाओं के बाद पन्ना लाल की पत्नी मीरा रोने लगी। पन्ना लाल के एक रिश्तेदार बृजलाल रोते हुए बताते हैं कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने कि स्थिति नहीं है और इसलिए अब हम लोगो को घर वापस लौटना पड़ रहा है।   

प्रतीकात्मक

माननीय प्रधानमंत्री ने गरीब लोगों के लिए "प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना" का शुभारंभ किया था। इस योजना में बहुत से प्राइवेट अस्पतालों को भी जोड़ा  ताकी किसी व्यक्ति को सरकारी अस्पताल में सुविधा न मिलने पर प्राइवेट अस्पताल में सुका इलाज किया जा सके। लेकिन शायद प्रधानमंत्री जी हमारे देश की चिकित्सा सेवाओं से जुड़े डाक्टरों का गणित नहीं जानते हैं। हालही में यह गणित एक मामले में उजागर हुआ है। घटना 27 दिसंबर 2018 की है और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आई है। 

केजीएमयू से सामने आया मामला

प्रतीकात्मक

लखनऊ का केजीएमयू चिकित्साशास्त्र का एक बेहतरीन संस्थान मान जाता है। लेकिन यहां के डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत न तो मरीजों का पंजीकरण सरलता से कर रहें हैंऔर न ही पंजीकृत मरीजों को सही इलाज दे रहें हैं। यह हम नहीं कह रहें हैं बल्कि हालही में लखनऊ के केजीएमयू से सामने आये एक मामले में यह सब खुला दिखाई पड़ रहा है। यहां के मरीजों को ओपीडी, ओपीडी से ट्रॉमा की और लगातार दौड़ाया जा रहा है। अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हील चेयर तक उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

आयुष्मान योजना के मरीजों के इलाज में लापहवाही 

प्रतीकात्मक

केजीएमयू अस्पताल में उमा वर्मा बाराबंकी उत्तर प्रदेश से इलाज कराने आई थी। इनकी रीढ़ में फोड़े की समस्या है। इनके पिता रघुराज ने आयुष्मान योजना के तहत कवायद शुरू की। डॉ. आरएन श्रीवास्तव के निर्देशन में इलाज शुरू किया गया तथा मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी गई। बीपीएल कार्डधारक रघुराज शिकायत करते हुए कहते हैं कि आयुष्मान योजना के तहत कई बार हम लोगों ने आवेदन किया लेकिन फिर भी इलाज शुरू नहीं किया गया। अब तक दूसरी जांचो पर हमारे ही 5 हजार से ज्यादा रुपये खराब हो चुके हैं। मरीज के पिता रघुराज ने उधार लेकर किसी प्रकार से जांच पूरी कराई लेकिन जब पैसे की समस्या सामने आई तो परिजनों ने इलाज के खर्च पर असमर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद में गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर डाला जिसके बाद डाक्टरों ने उमा वर्मा का पंजीकरण आयुष्मान योजना के तहत किया। अब आप खुद विचार करें की पीएम मोदी के द्वारा शुरू की गई एक अच्छी योजना की हालत डाक्टरों ने क्या कर डाली है।