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इस गांव में है शाहरुख़ जैसे ‘ज़ीरो’ की भरमार

आजकल शाहरुख़ खान की फिल्म 'जीरो' पर्दे पर लोगों द्वारा खूब पसंद की जा रही है। वैसे तो शाहरुख़ अपने रोमांटिक किरदार के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस फिल्म में किंग खान ने बउवा नाम के 'बौने' लड़के का किरदार निभाया है। आमतौर पर आपको हर गांव या शहर में एक या दो बउवा जैसे कम लम्बाई के इंसान दिखाई देते होंगे। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां एक, दो या तीन नहीं, बल्कि पूरा गांव ही बउवा है मतलब बउवा की तरह छोटी लम्बाई के लोग हैं।

प्रतीकात्मक
 

दरअसल असम के गुवाहाटी शहर से 90 किलोमीटर दूर एक गांव है। इस गांव का नाम है अमार गांव। भारत-भूटान सीमा से तीन या चार किलोमीटर पहले अमार गांव में करीब 70 लोग रहते हैं। इस गांव में किसी की भी लम्बाई साढ़े तीन फिट से अधिक नहीं है। दूसरे गांव के लोगों द्वारा इस गांव को बौनों का गांव कहा जाता है। इनमें से कुछ लोग इस गांव में खुद ही रहने आये हैं, तो कुछ को उनके घरवाले ही छोड़कर गए हैं। 

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सभी बौने हैं कलाकार

अमार गांव का मतलब है हमारा गांव। यहां के लोगों की लम्बाई भले ही छोटी हो, लेकिन इनकी सोच और इरादे बहुत बड़े हैं। ये लोग अन्य गांव के लोगों की तरह दिन में तो खेती-बाड़ी ही करते हैं, लेकिन शाम ढलते ही शुरू होता है इनके नाटक का दौर। रात को इस गाँव के ये सभी लोग रंगमंच के कलाकार बन जाते हैं। इन सभी लोगों की एक नाटक की मंडली है, जो अपने शहर के साथ-साथ अन्य शहरों में जाकर भी नाटक करते हैं। लोगों द्वारा इनकी कला की खूब तारीफ़ भी की जाती है। इस पूरे गांव में दो मंजिला लकड़ी के मकान हैं, इन्हीं में ये लोग रहते हैं।  

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पबित्र राभा ने बसाया है ये गांव

इस गांव को बसाने का श्रेय 'पबित्र राभा' को जाता है। पबित्र राभा खुद भी 'नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा' से निकले एक रंगमंच कलाकार हैं। कम लम्बाई के लोगों से सहानुभूति रखने वाले पबित्र राभा ने एनएसडी से निकलने के बाद रंगमंच को बढ़ावा दिया और असम के गांव-गांव में जाकर इन लोगों को इकठ्ठा करके कलाकार बनाया।