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कर्ज माफ़ी से किसानों की बढ़ती समस्याएं, 24 प्रतिशत बढ़ी NPA

प्रतीकात्मक

हाल ही में कांग्रेस ने तीन राज्यों में चुनाव जीते हैं। इन चुनावों को जीतने के बाद में कांग्रेस ने सबसे पहला कार्य किसानों को कर्जमाफी का किया। कर्जमाफी किसानों को तुरंत राहत तो दे सकती है लेकिन बता दें की कर्जमाफी किसानों तथा बैंको के लिए समस्याएं पैदा करने वाला कार्य है। इस बारे में हमने कई ऐसे तथ्य खोजे हैं जो बैंको तथा किसानों के लिए समस्या बनेगे। कुल मिलकर यह कहा जा सकता है कि कर्जमाफी ऊपर से जितनी चमकदार लगती है गहरे में वह किसानों तथा बैंको के लिए कई समस्याएं पैदा कर सकती है। आइये जानते हैं आखिर बैंकों तथा किसानों को क्या क्या समस्याएं कर्जमाफी के बाद हो सकती हैं। 

1 - कर्जमाफी की घोषणा के बाद से ही किसान बैंकों को ऋण देना बांध कर देते हैं। इस कारण बैंकों संपूर्ण वित्तीय ढांचा बिगड़ जाता है। दूसरी और जब तक राज्य सरकार बैंकों की राशि की प्रतिपूर्ति नहीं करती है तब तक बैंक भी ग्राहकों को कर्ज देने में धीमा हो जाते हैं। इस कारण से किसानों की केडिट सप्लाई भी धीमी हो जाती है और किसानों को बाहरी स्रोतों  लेना पड़ता है। 

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2 - मध्य प्रदेश कि बात करें तो पिछले तीन सालों 2014 -15 से जून 2018 तक एनपीए बढ़कर दोगुने 10.6 प्रतिशत पर पहुंच चुका है। मार्च 2018 के अंत में कृषि ऋण खंड में एनपीए लगभग 5.1% अनुमानित था लेकिन कर्ज का भुगतान नहीं करना समस्या का केवल एक हिस्सा है। कर्जमाफी के बाद में किसान बैंकों के ऋण को देना बंद कर देते हैं इस प्रकार के ट्रेंड को राजस्थान में भी देखा जा चुका है। 

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3 - कर्जमाफी के बाद बैंक किसानों को नया फंड देने में धीमा हो जाते हैं। इस कारण किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। असल में होता यह है कि कर्जमाफी के बाद राज्य सरकार बैंकों की राशि देने में काफी ज्यादा समय लगाती है अतः बैंक भी नया कर्ज देने में सावधान हो जाते हैं। 

4 - आपको बता दें कि तमिलनाडू में एक योजना के तहत कर्जमाफी की घोषणा की थी। लेकिन बैंकों के पास राज्य सरकार समय से धन नहीं पंहुचा पाई। इस कारण वहां के बैंक नए कर्ज देने के मामले में धीमे पड़ गए। हालही में कर्नाटक में हुए राज्य स्तर की बैठक में यह मामला सामने आया है की राज्य के उत्कृष्ट कृषि ऋण में 5,353 करोड़ की कमी आई है। आपको हम यह भी बता दें कि कर्जमाफी से बैंकों कि क्रेडिट साइकिल टूट जाती है क्यों कि बैंक अपनी बकाया राशि को क्लियर करना चाहते हैं।