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"चुंबन प्रतियोगिता" का आयोजन, सियासत में माहौल हुआ गर्म

चुंबन यानि KISS हमारे भारतीय समाज में एक ऐसा कार्य माना जाता है। जिसका नाम भी सार्वजानिक नहीं लिया जाता है। खैर आपको याद दिला दें कि भारत के केरला में "Kiss of Love protest" की शुरुआत 2014 में हुई थी। जिसका आयोजन कुछ समय बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी सार्वजानिक रूप से किया गया था। इस Protest बहुत से युवाओं ने हिस्सा लिया था। इसी क्रम में झारखंड में भी चुंबन यानि KISS को लेकर माहौल गर्माता जा रहा है। असल में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से जुड़े डांगापाड़ा के क्षेत्रीय विधायक साइमन मरांडी ने झारखंड के पाकुड़ मेले में "चुंबन प्रतियोगिता" कराने की घोषणा की है। इस बारे में धनबाद में साइमन मरांडी ने कहा था कि "संताल परगना में चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन फिर से किया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां जोरो से चल रही हैं।" साइमन मरांडी की इस घोषणा पर बीजेपी नेताओं ने आपत्ति जताई है। आपको यहां बता दें की पिछले वर्ष साइमन मरांडी के विधान सभा क्षेत्र लिट्टीपाड़ा में चुंबन प्रतियोगिता को लेकर  काफी विवाद हुआ था। इस वर्ष एक बार फिर से पाकुड़ मेले में साइमन ने चुंबन प्रतियोगिता के आयोजन की बात कर नए विवाद को जन्म दे दिया है। साइमन ने पाकुड़ मेले में इस प्रतियोगिता का दिन 15 दिसंबर रखा है। 

बीजेपी नेताओं जताई आपत्ति

इस खबर के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल सहदेव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि "झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी झारखंड और भारत की संस्कृति को नष्ट करने पर लगी हुई है। ये लोग शायद भूल रहें हैं कि हमारे यहां रोम और लंदन वाली सभ्यताएं नहीं चलती हैं। साइमन को अपने कहे शब्दों के लिए जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए।" इससे पहले झारखंड के कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने भी इस प्रतियोगिता को लेकर साइमन को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि "चुंबन प्रतियोगिता पाश्चात्य संस्कृति का प्रतीक है और इसको झारखंड में स्वीकृति नहीं दी जा सकती है।" अब देखना यह है की आने वाली 15 दिसंबर को क्या कुछ होता है अथवा नहीं।