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क्या है इज्तिमा का पूरा सच

बुलंदशहर के दरियापुर इलाके में 1-3 दिसंबर तक इज्तिमा का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का आज आखिरी दिन था। दुनिया भर से करोड़ों मुस्लिम समाज के लोग इस तीन दिन की तब्लीगी इज्तिमा में शामिल हुए। इज्तिमा में विदेशों से भी लाखों मुसलमान शामिल हुए। इज्तिमा में आने वाले मेहमान अकीदतमंदों की खिदमत में कोई कसर न रहे, इसके लिए इज्तिमा प्रबंधक कमिटी द्वारा तमाम व्यवस्थाएं की गयी। सभी अकीदतमंदों को भोजन, पानी से लेकर तमाम बुनियादी जरूरतें भी दी गयी। कुछ लोगों का अनुमान है कि इस तब्लीगी इज्तिमा में तीन दिन में 1.5 करोड़ से भी अधिक लोग शामिल हुए। 

देखने लायक बात यह है कि लाखों-करोड़ों लोग शामिल होने के बाद भी तब्लीगी इज्तिमा बहुत शांति से हुआ। जिसके लिए वो जाना जाता है। स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम को देखते हुए व्यवस्था पूरी तरीके से बनाई रखी। हालाँकि लाखों अकीदतमंदों के इज्तिमा में शामिल होने के कारण जिले में जाम बहुत देखने को मिला। 

क्या होता है तब्लीगी इज्तिमा?

इज्तिमा का अर्थ है धार्मिक जमावड़ा। तब्लीगी इज्तिमा का मतलब है बहुत अधिक संख्या में लोगों के इकट्ठे होने के बाद धर्म के बारे में बताना। यह एक कमिटी द्वारा एक आयोजित कार्यक्रम होता है। इसमें पूरी दुनियां से लाखों मुस्लिम धर्म के लोग शरीक होते हैं। जिसमें सभी मिलकर दुनियां में अमन-चैन के लिए इबादत करते हैं। इस कार्यक्रम की तैयारी 4 से 5 महीने पहले से शुरू हो जाती है। इसमें तब्लीगी जमात के लोग अपने खर्च पर घर-घर जाकर लोगों को इज्तिमा की दावत देते हैं। इसके बाद सभी इकट्ठे लोगों को इस्लाम धर्म के बारे में शिक्षा दी जाती है और देश और दुनिया की खुशामदी के लिए दुआ की जाती है। यह हर वर्ष राष्ट्रिय या वैश्विक तौर पर किया जाता है।

इज्तिमा का इतिहास

इज्तिमा की शुरुआत 1927 में हुयी थी। इसे मोहम्मद इलियास अल कांधलवी द्वारा शुरू किया गया था। जो अब तक 213 देशों तक फ़ैल चुका है। इसका उद्देश्य दूर-दराज के गांवों में रहने वाले कम शिक्षित मुसलमानों को धार्मिक तौर शिक्षित कराना था।