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कभी आतंकी रहे नज़ीर, फौजी बनकर हुए देश के लिए शहीद

जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में कभी भी पाकिस्तान अपनी और से सीज फायर का उल्लंघन कर देता है। इस बजह से कई बार वहां के आम नागरिक घायल तक हो जाते हैं। इसी प्रकार से जम्मू-कश्मीर कई बार जब आतंकियों की सेना के जवानों से मुठभेड़ हो जाती है तो भारतीय सेना के जवान भी शहीद होते देखे जाते हैं। अब तक आपने जम्मू-कश्मीर में सेना के कई जवानों के शहीद होने की घटनाओं को देखा या सुना हो होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे फौजी के बारे में यहां बता रहें हैं। जो पहले खुद की आतंकी था और बाद में भारतीय सेना का एक वीर जवान भी रहा। इस युवा फौजी का नाम "नजीर अहमद वानी" है। हालही में रविवार को कश्मीर के शोपियां में हुए आतंकी हमले में नजीर अहमद वानी शहीद हो गए। आपको बता दें की नजीर अहमद वानी अभी महज 38 वर्ष के थे और भारतीय सेना में लांस नायक के पद पर कार्यरत थे। सन 2007 तथा इस वर्ष अगस्त में नजीर अहमद को वीरता के लिए "सेना मेडल" से सम्मानित किया गया था। 

कभी खुद आतंकी रहे थे नजीर - 

आपको जानकारी दे दें की भारतीय सेना में लांस नायक रहे नजीर अहमद कभी खुद आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहते थे। बाद में उन्होंने खुद ही समर्पण कर दिया था और 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हो गए थे। टेरिटोरियल आर्मी की 162वीं बटालियन में उन्होंने अपनी सेवायें देना प्रारंभ किया था। सेना में रहते हुए नजीर अहमद ने कई खतरनाक आपरेशन को उनके अंजाम तक पहुंचाया था इसलिए ही सेना की और से वे दो बार सम्मानित भी हो चुके थे। 

सेना के एक अधिकारी के मुताबिक बाटागुंड में मुठभेड़ के दौरान नजीर को गोलियां लगी थी। इसके तुरंत बाद में उनको अस्पताल ले जाय गया लेकिन तब तक वे शहीद हो चुके थे। सोमवार को अंतिम संस्कार के दौरान नजीर अहमद का शव तिरंगे में लपेटा गया तथा उनको सेना की और से 21 बंदूकों की सलामी दी गई। नजीर के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा तथा बेटी है।