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खूंखार डाकू, आज सियासत में है इनका दबदबा

माना जाता है कि वक्त जब बदलता है तो सभी में उसका परिवर्तन दिखाई पड़ता है। इसका साक्ष्य आप मध्य प्रदेश में आज भी देख सकते हैं। वर्तमान समय में मध्य प्रदेश में शांति से चुनाव चल रहें हैं। लेकिन एक समय था जब मध्य प्रदेश के बीहड़ वाले क्षेत्रो की राजनीति डाकुओं की बंदूक तय करती थी। बता दें कि उस समय दो बड़े ही नामी तथा दुर्दांत डाकू चंबल के बीहड़ों निवास करते थे। इन दोनों की अपनी अपनी बड़ी गैंग थी और दोनों पर अलग अलग जुर्म में बहुत से केस भी समय समय पर दर्ज होते रहें हैं। यह वह समय था जब इन दोनों डाकुओं के नाम से चम्बल क्षेत्र का बच्चा बच्चा कांप उठता था। समय बदला और इसी के साथ बदल गया चंबल का वातावरण भी। आज के समय में ये दोनों डाकू चंबल कि सियासत में अपना अहम स्थान रखते हैं और इस समय होने वाले चुनावों में दोनों ही लोगों से वोट मांगते दिखाई दे रहें हैं। आइये अब आपको विस्तार से बताते हैं इन दोनों डाकुओं के वर्तमान समय का सच। 

सबसे पहले आपको बता दें की 80 के दशक में अपनी गोलियों से चंबल को दहलाने वाले इन दोनों डाकुओं के नाम "मलखान सिंह तथा मोहर सिंह" हैं। इस समय चल रहें मध्य प्रदेश चुनाव में मलखान सिंह BJP की और से उम्मीदवार है और लोगों से वोट मांग रहें हैं। दूसरी और डाकू मोहर सिंह कि पहचान पक्के कांग्रेसी के तौर पर है। दर्जनों हत्या तथा लूट के केस झेल चुके मलखान सिंह आज कांग्रेस को कोसते दिखाई देते हैं। इनका कहना है की "हमने कभी डकैतगिरी की ही नहीं, जो ऐसा करता है वह नष्ट हो जाता। आप खुद ही देख लें जो ऐसे काम करते थे आज उनका कोई नाम लेवा नहीं है।" मलखान सिंह अपने क्षेत्र में "मामा" के नाम से फेमस हैं और शिवपुरी, भिंड तथा मुरैना में उनको एक ब्रांड के तौर पर देखा जाता है। 

वहीँ दूसरी और मोहर सिंह कांग्रेस का दामन थामे बैठे हैं। आपको बता दें कि डाकू मोहर सिंह कांग्रेस के टिकट पर जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आज बाले ही वह 90 वर्ष के हो चुके हों लेकिन उन्होंने कभी कांग्रेस का हाथ नहीं छोड़ा। मोहर सिंह का कहना है की "यदि हम जिंदा हैं तो इंद्रा गांधी कि बजह से इसलिए ही हमने कभी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़ा है।" समय बदलने पर उसका प्रभाव सभी पर पड़ता ही है। कभी भिंड की राजनीति डाकुओं की गोलियों से तय होती थी लेकिन आज इसकी बोलियों से तय होती है।