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25 नवम्बर, अयोध्या में होने वाली है रामभक्तों की महासभा

तारीख 6 दिसंबर 1992, एक ऐसा दिन जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इस दिन राम जन्मभूमि अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद् का एक महा सम्मेलन हुआ था और इसमें भाग लेने भाजपा के भी कई दिग्गज नेता भी आये थे। लाखों की संख्या में राम भक्त भी जुट चुके थे। पुलिस प्रशासन ने भी कमर कस ली। अचानक हजारों राम भक्त विवादित ढांचे की तरफ बड़े और पुलिस के लाख रोकने के बाद भी मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया। 

 आज हम ये बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अब 3 दिन बाद 25 नवम्बर को अयोध्या में एक बार फिर महासम्मेलन होने वाला है। विश्व हिन्दू परिषद् के इस सम्मलेन में UP के बीजेपी के सभी विधायक और सांसद और साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल होने वाले हैं। और इसी दिन देश के कोने कोने से हजारों साधु संत भी यहां पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस धर्मसभा में करीब 10 लाख राम भक्त जुटने वाले हैं। इसके लिए 9000 बसों का इंतज़ाम किया गया है। UP के हर जिले से 5 से10 हजार राम भक्त लाये जाने लाने की उम्मीद है और राम भक्तों को यहां लाने की प्रक्रिया अभी से शुरू कर दी गयी है।

अयोध्या में हिन्दुओं की होने वाली इस महासभा को देखते हुए अयोध्या मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि "इस भीड़ से मुझे खतरे की आशंका लग रही है क्यों कि भीड़ किसी के नियंत्रण में नहीं रहती। 1992 के सम्मलेन में भी दिग्गज नेता मौजूद थे लेकिन उनके मना करने पर भी भीड़ ने मस्जिद को गिरा दिया था। इसलिए अयोध्या के सभी मुसलमानों को सुरक्षा प्रदान की जाय। मुझे 1992 की घटना फिर होने का अनुमान लग रहा है।" 

 इस पर सभी हिन्दू संगठनों द्वारा मुस्लिमों को भरोसा दिया गया कि मुस्लिम भाइयों को कोई परेशानी नहीं होने देंगे। क्योंकि हमारी लड़ाई किसी मुसलमान से नहीं सरकार से है।  यह सब देखते हुए इक़बाल अंसारी की सुरक्षा भी बड़ा दी गयी है।

दरअसल कई वर्षों से कोर्ट में अटके राम मंदिर विवाद पर 29 अक्टूबर को फैसला आने वाला था। लेकिन फैसले का इंतज़ार करते सभी राम भक्त इस दिन भी निराश हुए और कोर्ट ने फैसले की तारीख जनवरी 2019 तक के लिए टाल दी। 

 2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी के घोषणा पत्र में राम मंदिर बनाने का मुद्दा भी था। मुद्दा पूरा ना होने पर कई हिन्दू संगठनों द्वारा बीजेपी सरकार को संसद में अध्यादेश बनाकर राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने को कहा गया, लेकिन इस पर भी राम भक्त निराश हुए। साढ़े 4 साल तक बीजेपी की सरकार रहने के बावजूद भी जब राम मंदिर निर्माण कार्य की कोई उम्मीद नज़र आ रही तो मानों सभी राम भक्तों का सब्र टूट रहा है। जिससे अब सरकार पर दबाव बनाने के लिए इस महासभा का आयोजन किया जा रहा है। 

 इस मामले पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण आज भी हमारा उद्धेश्य है लेकिन हमारी सरकार चाहती है कि राम मंदिर का निर्माण संवैधानिक रूप से हो।