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दो राज्यों में सीबीआई की एंट्री बैन

क्या हर उलझे मामले की जांच के लिए भरोसेमंद सीबीआई पर से दो राज्यों आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल का भरोसा उठ गया है? या फिर उनके मुख्यिमंत्रियों की प्रधानमंत्री के साथ हुई तनातनी के कारण ऐसा हुआ? यदि नहीं तो फिर उन दोनों राज्यों में सीबीआई की नो एंट्री का मतलब क्या है? इन सवालों का जवाब देश का हर नागरिक जानना चाहता है।

इस उहापोह की स्थिति आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा अपने-अपने राज्य में सीबीआई से कोई भी जांच नहीं करवाने के फैसले से उत्पन्न हुई है। हालंकि ऐसा दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराजगी की वजह से किया है। इस दोनों राज्य आंध्र और पश्चिम बंगाल उस 'सामान्य सहमति' की बात से इनकार करते हैं, जिसके आधार पर सीबीआई किसी राज्य में जांच कर सकती है या छापे मार सकती है। इसका अर्थ यह हुआ कि चंद्रबाबू नायडू सरकार की अनुमति के बगैर  सीबीआई राज्य में कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी।

हाल—हाल तक चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी एनडीए का हिस्सा थी। उससे अलग होने के बाद नायडू ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार टीडीपी के विधायकों को तंग करने के लिए उन पर सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग के छापे डलवा रही है। इसी संदर्भ में अब नायडू सरकार ने राज्य में सीबीआई को कोई कार्रवाई करने से रोक दिया है। उनका कहना है कि उनकी अनुमति के बगैर सीबीआई कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी।

इस बात की मीडिया को मिली जानकारी भी राज्य के प्रधान सचिव(गृह) ए आर अनुराधा के एक गोपनीय सरकारी आदेश के 15 नवंबर की रात लीक होने से हुई। इस संबंध में आंध्र सरकार के जनरल ऑर्डर में कहा गया है कि'' दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 (डीएसपीई एक्ट) की धारा छह के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, इसके सभी सदस्यों को राज्य में शक्तियों और क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के लिए दी गई सामान्य रजामंदी वापस लेती है।''

इसी साल तीन अगस्त को आंध्र सरकार ने यह आदेश जारी किया था। केंद्र सरकार, केंद्र सरकार के उपक्रम के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ जांच के लिए आंध्र प्रदेश में शक्तियों और क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को ‘सामान्य रजामंदी' देने वाला सरकारी आदेश जारी किया गया था।

दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत सीबीआई का गठन हुआ था, लेकिन 3 अगस्त 2018 को अन्य राज्यों की तरह आंध्र सरकार ने सीबीआई को दी गई सहमति को नविनीकरण किए जाने के आधार पर अब राज्य सरकार द्वारा समझौते को रद्द करने के बाद सीबीआई राज्य सरकार से सहमति के बगैर राज्य में किसी भी तरह की खोज, छापे या जांच नहीं कर सकती।

बहरहाल, नायडू सीबीआई के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हैं, लेकिन बताते हैं कि कुछ कारोबारी प्रतिष्ठानों पर आयकर अधिकारियों के हाल में पड़े छापे से नायडू बहुत नाराज हैं। इनमें से कुछ प्रतिष्ठान राज्य की सत्तारूढ़ टीडीपी के करीबियों के हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सीबीआई के विवाद और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की वजह से जांच एजेंसी पर राज्य सरकार का भरोसा कम हुआ है। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आंध्र सरकार के इस कदम का समर्थन कर दिया है। इस वजह से सबसे अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के भीतर मौजूद केंद्र के उपक्रमों और कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर पड़ेगा।