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शाकाहारी मगरमच्छ,71 वर्ष से है इस मंदिर का रक्षक

  

दुनियाँ में बहुत सी खूबसूरत जगह हैं। जहाँ जाने की इच्छा हर कोई रखता है। लेकिन दुनियाँ जितनी खूबसूरत है उतनी ही रहस्यमयी भी। इस दुनियां में बहुत सी ऐसी जगह हैं जहाँ कई रहस्य छुपे हैं। इन जगहों के बारे में पढ़कर या जानकर इंसान सोचने को मजबूर हो जाता है कि "क्या ऐसा भी हो सकता है?" जिनमें से एक है "अनंतपुरा लेक मंदिर". यह एक ऐसा मंदिर है जो खुद में कई रहस्यों को छुपाये हुए है। इन सभी रहस्यों में से एक है कि इस मंदिर की रक्षा एक 'मगरमच्छ' करता है। जो कि पूर्ण रूप से शाकाहारी है और यह मगरमच्छ पिछले 71 सालों से इस मंदिर की रक्षा कर रहा है। कौन है ये मगरमच्छ ? क्या है इस मंदिर की कहानी? आइये जानते है.....

केरल के कुम्बाला शहर से 6 किमी दूर अनंतपुर के एक छोटे से गांव में भगवान अनंतपद्मनाभाका मंदिर है। अनंतपद्मनाभा, भगवान् विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इस मंदिर की एक खास बात है कि यह झील के मध्य में बनाया गया है। लेकिन इस से भी ज्यादा खास और रहस्यमयी बात है कि इस झील में एक मगरमच्छ रहता है, जो शाकाहारी है। इस मगरमच्छ का नाम है "बाबिया". यहाँ के लोगों का कहना है कि यह शाकाहारी मगरमच्छ ही इस मंदिर की रक्षा करता है। बाबिया पिछले 71 सालों से इस झील में है।

बेहद शांत स्वभाव का है बाबीया

आमतौर पर मगरमच्छ का स्वभाव बहुत खूंखार देखा जाता है लेकिन लोगों का कहना है कि बाबिया बेहद शांत स्वाभाव का है। वो चुपचाप भक्तों द्वारा दिया गया प्रसाद खाता है और उन्हें कोई परेशानी नहीं देता। झील में रहने वाली मछलियों को भी बाबिया से कोई परेशानी नहीं है। मंदिर पर कोई आपदा आने से पहले बाबिया संकेत दे देता है, इसी प्रकार से वह मंदिर की रक्षा करता है।

मंदिर का इतिहास

कहा जाता है कि 9 वीं शताब्दी में जब मंदिर का निर्माण हुआ था, तभी अचानक इस झील में एक मगरमच्छ गया। इसके बाद से यहाँ हमेशा एक मगरमच्छ रहता है। अगर एक मर जाता है तो दूसरा खुद ही जाता है। लेकिन मगरमच्छ आता कहाँ से है, यह एक रहस्य बना हुआ है। इस मंदिर के पीछे की एक कहानी यह है कि एक बार भगवान् विष्णु के परम भक्त विल्वामंगलथूकोच्चि के इस क्षेत्र में तपस्या कर रहे थे। तभी भगवान कृष्ण, बालक रूप में प्रकट होकर उन्हें परेशान करने लगे। जिससे विल्वामंगलथू तालाब में गिर गए। माना जाता है कि ये मगरमच्छ विल्वामंगलथू ही है। जिसके दर्शन के लिए लोग दूर दूर से आते हैं।

Written by: Harry Panwar