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एक ही चट्टान को काट कर बनाया है, यह मंदिर।

अपने देश में बहुत से ऐसे मंदिर हैं जिनको देखकर बड़े बड़े वास्तु विशेषज्ञ आज भी हैरान रह जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर की जानकारी यहां दे रहें हैं। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को "कैलाश मंदिर" के नाम से जाना जाता है। यह अदभुद मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद की एलोरा गुफाओं में स्थित है। इस मंदिर कि सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तुकला है। आपको बता दें की इस विशाल मंदिर को 7 वीं शताब्दी में मात्र एक चट्टान को काटकर बनाया गया था। कैलाश मंदिर को देखकर आज के आधुनिक इंजीनियर भी हैरत में पड़ जाते हैं। इन लोगों का मानना है कि यदि आज के समय में ऐसी किसी ईमारत का निर्माण प्रारंभ किया जाए तो उसको बनने में सदियां लग जाएंगी लेकिन आश्चर्य कि बात है कि इस मंदिर को सिर्फ 18 वर्ष में ही बना दिया गया था। 

कैलाश मंदिर को राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण ने निर्मित कराया था। इसकी अदभुद वास्तुकला का एक विशेष तथ्य यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही चट्टान को काट कर बनाया गया था। माना जाता है कि इस मंदिर के निर्माण के समय इसको हिमालय स्थित कैलाश पर्वत कि आकृति देने की कोशिश कि गई थी इसलिए ही इसको कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर को 40 हज़ार टन बजन की एक चट्टान को काट कर बनाया गया था। कैलाश मंदिर के सामने नंदी की विशाल प्रतिमा है साथ ही दोनों और विशाल हाथी तथा स्तंभ भी बनाये गए थे जो आज भी मौजूद हैं। इसके अलावा इस मंदिर में पत्थरों पर स्थान स्थान पर नक्काशी भी की गई है। इस मंदिर कि एक खासियत यह भी है कि इसको ऊपर से नीचे कि और बनाया गया है जब की आधुनिक इमारतें नीचे से ऊपर कि और बनाई जाती हैं। औरंगाबाद से महज 30 किमी पर यह मंदिर स्थित है। आज भी दुनियां के बड़े बड़े वास्तुकला विशेषज्ञ और आर्किटेक्ट इस मंदिर को देखकर हैरान रह जाते हैं खैर हमारे पूर्वजों के वास्तुकला में निपुण होने का यह एक जीवंत उद्धरण है।