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ऐसे बढ़ जाता है रेल का किराया

प्रतीकात्मक

क्या आप जानते हैं कि रेलवे द्वारा निर्धारित किए गए किराये के बावजूद रेल टिकट का किराया क्यों बढ़ जाता है? सच तो यह है कि रेलवे और आईआरसीटीसी, दोनों मिलकर रेल टिकट का किराया बढ़ा देते हैं। इसका खुलासा गुजरात के एक व्यक्ति द्वारा किए गए शिकायत के बाद हुआ।

गुजरात स्थित अहमदाबाद के मीत शाह और राजकोट के आनंद रणपाड़ा ने रेलवे तथा भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लि.(आईआरसीटीसी) के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग(सीसीआई) से शिकायत की कि उससे ई—टिकट में वास्तविक मूल्य के बदले में अधिक कीमत वसूले गए। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने जांच का आदेश दिया है।   

उल्लेखनीय है कि जब भी कोई व्यक्ति आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिए टिकट बुकिंग करवाता है तो उसे राउंड आॅफ के रूप में किराया चुकाना होता है। जैसे रेलवे के नियम के मुताबिक अगर आपका किराया 122 रुपए हुआ है तो आपसे राउंडअप के नाम पर 125 रुपए वसूले जाएंगे। इस तरह से रेलवे किराया 5 रुपए के गुणक में ही वसूलता है। 

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इस बावत सीसीआई ने ई-टिकट की बिक्री में वास्तविक मूल्य के मुकाबले अधिक कीमत वसूलने को सही नहीं मानती है। नतीजा उसने इस कथित दुरूपयोग को लेकर भारतीय रेल तथा उसकी इकाई आईआरसीटीसी के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। दरअसल रेलवे और उसकी वेबसाइट आईआसीटीसी से जब भी टिकट बुक की जाती है तो वे हमेशा राउंडअप के नाम पर टिकट कीमत बढ़ा देते हैं। इस क्रम में उनके द्वारा कीमत को अक्सर पांच के गुणक में पहुंचने के लिए निकटतम ऊपरी अंक को ही निर्धारित करता है। जैसे 122 की जगह 125 तय किया जाता है। यदि उसे राउंडप में करना ही है तो 122 को 120 भी किया जा सकता है। यानि कि राउंडप के निकटतम नीचे का अंक क्यों नहीं तय किया जाता है?

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यह समस्या आए दिन आन लाइन बुकिंग में देखने को मिलती है। आयोग के अनुसार रेल टिकट बिक्री के लिये यह अनुचित शर्तें थोपने जैसा ही है। सीसीआई ने इसे पहले दृष्टिकोण में प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का मामला पाया। उसक बाद ही उसने नौ नवंबर को अपने आदेश में जांच इकाई को मामले की जांच करने का आदेश दिया।

जांच में मामले से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच की जाएगी।

आयोग का इस बावत कहना है, '‘इस समय ऐसा लगता है कि प्रतिवादी (रेल मंत्रालय और आईआरसीटीसी) बिना यथोचित कारण के आनलाइन बुकिंग में वास्तविक किराये को ‘राउंडअप’ करते हैं। शिकायत के अनुसार ग्राहक पूरी तरह रेल मंत्रालय और आईआरसीटीसी पर निर्भर है तथा उसके बाद उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का कोई विकल्प नहीं है।''

इसपर रेलवे और आईआरसीटीसी का तर्क है कि टिकट के मामले में खुदरा राशि लेने और देने से लेन-देन में लगने वाला समय बढ़ेगा। ऐसे में लेन-देन में लगने वाले समय में कमी लाने तथा यात्रियों को तीव्र सेवा देने के लिये किराये को ‘राउंडआप’ करने का फैसला किया गया है।