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देशभर में अभी और बदले जा सकते हैं शहरों के नाम, जानें किस शहर का होगा क्या नाम।

फैजाबाद से अयोध्या, इलाहाबार से प्रयागराज, औरंगजेब रोड से एपीजे अब्दुल कलाम रोड, मुगलसराय से पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम बदलने के फैसले काफी चर्चित रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि पिछले 4 सालों में मोदी सरकार ने कई शहरों—कस्बों के नाम बदल डाले हैं। और तो और केंद्र सरकार ने बीते एक साल में कम से कम 25 नगरों और गांवों के नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। इसके साथ ही नाम बदलने के प्रस्तावों की झड़ी लग गई है। इनमें पश्चिम बंगाल का नाम बदला जाना भी शामिल है। पहले जानते हैं वे नाम जो गुम हो गए और उनकी पहचान नए नामों से होने लगी है। 

बंगलोर से बेंगलुरु: नवंबर 2014 में बेंगलोर का नाम बदलकर बेंगलुरु किया गया था। इसके अलावा कर्नाटक के 12 दूसरे शहरों का भी नाम बदला गया, जिनमें मैसूरु और मेंगलुरु भी है। शहरों के नाम बदलने के पीछे कन्नड़ भाषा के सही उच्चारण का तर्क दिया गया।  

औरंगजेब रोड का नाम बदलकर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम: यह बदलाव अगस्त 2015 में किया गया, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ। इसे बदलने के पीछे का तर्क बीजेपी सांसद महेश गिरि कुछ इस तरह से दिया था— अतीत में की गई गलतियों को ठीक करने का मौका है।

राजाहमुंद्री बना राजामहेंद्रवर्मन: यह बदलाव अक्टूबर 2015 में किया गया। इसके पीछे 11वीं सदी के शासक राजामहेंद्रवर्मन के सम्मान देने का तर्क दिया गया। 

गुड़गांव से गुरुग्राम: हरियाणा का शहर और दिल्ली का उपनग गुड़गांव को अप्रैल 2016

गुरुग्राम कर दिया गया। यह बदलाव महाभारत के गुरु द्रोणाचार्य के नाम पर किया गया। इसी राज्य में मेवात का नाम नूंह कर दिया गया।

रेलवे स्टेशन: बेंगलुरु रेलवे स्टेशन का नाम को मई 2016 में 19वीं सदी के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनाना क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना के नाम पर रख दिया गया था। 

प्रधानमंत्री आवास: सितंबर 2016 में प्रधानमंत्री आवास 7आरसीआर के नाम को बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया। 

गांव का नाम: जनवरी 2017 हरियाणा के फतेहाबाद के गांडा गांव का नाम बदलकर अजित नगर रख दिया गया। इस बारे में ग्रामीणों का कहना था कि इस नाम के कारण युवाओं को शर्मिंदगी उठानी होती थी।  

टापू का नाम: ओडिशा के वीइलर टापू मिसाइल परीक्षण के जाना जाता है। इसे देखते हुए जुलाई 2017 में टापू का नाम मिसाइल मैन की स्मृति में एपीजे अब्दुल कलाम टापू रख दिया गया था।

बंदरगाह का नाम बदला: सितंबर 2017 में गुजरात के कांडला पोर्ट का नाम बदलकर जनसंघ के सह-संस्थापक के नाम पर उनकी जन्तशती वर्ष के मौके पर दीन दयाल पोर्ट कर दिया गया। 

सड़क का नाम: जुलाई 2018 में मुंबई के एलिफिंस्टन रोड का नाम ब्रिटिश गर्वनर के नाम पर था, जिसे बदलकर प्रभादेवी कर दिया गया।

मियों का बाड़ा बना महेश नगर: राजस्थान में यह बदलाव अगस्त 2018 में किया गया था। इसके पीछे ग्रामीणों ने तर्क दिया गया था कि मुस्लिम नाम होने के कारण उन्हें अपने बच्चों के विवाह के लिए प्रस्ताव नहीं मिलते थे, क्योंकि लोग इसे मुसलमानों का गांव समझते रहे हैं।

मुगलसराय रेलवे स्टेशन: इसका नाम अगस्त 2018 में बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय किया गया। इसकी स्थापना 1860 में हुई थी।

नाम बदलने की योजना

गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अहमदाबाद का नाम बदलकर कामावती रखने का प्रस्ताव दिया है। कई प्रस्तावों को केंद्र सरकार की अनुमति मिलनी बाकी है। इनमें पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला करने का भी प्रस्ताव है।

यूं बदले जाते हैं नाम

नाम बदलने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है और इसमें कई केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी शामिल होते हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले एक साल में देश के विभिन्न हिस्सों में 25 नगरों और गांवो के नाम परिवर्तन के प्रस्तावों को सहमति दी है। 

गृह मंत्रालय रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारत सर्वेक्षण विभाग से कोई आपत्ति नहीं होने के बाद ही किसी भी स्थान के नाम बदलने के लिए अनुमति मिलती है। किसी राज्य का नाम बदलने के लिए संसदीय प्रक्रिया अपनाई जाती है। संसद में साधारण बहुमत के साथ संविधान में संशोधन की आवश्यकता होती है, जबकि गांव या शहर के नाम एक कार्यकारी आदेश पर बदले जा सकते हैं। जैसे राज्य सरकार के सुझाव के तहत पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला करने का प्रस्ताव हाल ही में गृह मंत्रालय ने राय जानने के लिए विदेश मंत्रालय भेजा गया, क्योंकि प्रस्तावित नाम पड़ोसी देश बांग्लादेश के नाम से समान था।