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भारत सरकार ने twitter को लगाई फटकार

सोशल मीडिया में बहुचर्चित संदेशों के विविध रूपों में तेजी से फैलाने वाले ट्विटर पर भी आपत्तिजनक और अनैतिकता के कंटेंट की भरमार रहती है। इनसे तेजी से सामाजिक माहौल बिगड़ जाता है। किसी की शाख को एक झटके में ही बिगाड़ी जा सकती है। मीटू का ताजा उदाहरण सबके सामने है। इसके हैशटैग में आज इतनी ताकत आ गई है कि लोगों के साथ—साथ सरकारें भी इससे घबड़ाने लगी। इसी संदर्भ में भारत सरकार ने उसके जरिए फैलने वाले आपत्तिजनक साम्रगी को हटाने के लिए जमकर फटकार लगाई है। साथ ही सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा—निर्देश का पालन नहीं करने की स्थिति में ट्विटर को उसके खिलाफ कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है। 

यह फटकार सरकार ने 12 नवंबर को ट्विटर को ऐसी आपत्तिजनक और अवैध सामग्री हटाने की दिशा में बेहद धीमी गति से काम करने के लिए लगाई है, जिससे हिंसा भड़काने एवं महिलाओं के खिलाफ अपराधों को उकसाने वाले घृणा संदेश और अफवाहें फैलाने में कथित तौर पर मदद मिलती है। इस संबंध में सरकार का कहना है कि ट्विटर द्वारा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की जाएगी।

इस बावत दिशा—निर्देश को पालन करने के लिए गृह सचिव राजीव गौबा ने ट्विटर इंडिया के कानूनी, नीतिगत, विश्वास एवं सुरक्षा प्रमुख विजय गड़े और जन नीति की प्रमुख महिमा कौल को दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के आदेशों के तत्वरित निस्तारण के लिए चौबीस घंटे काम करने वाला तंत्र सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए आयोजित बैठक में माइक्रोब्लॉगिंग साइट के अधिकारियों को कहा गया कि कुछ मामलों में ट्विटर ने आपत्तिजनक विषयवस्तु को हटाने या ब्लॉक करने में बेहद धीमा रूख आपनाता रहा है।

बहरहाल, इस दिशा—निर्देश को अगले साल होने जा रहे आम चुनाव के  नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि इस संदर्भ में भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी ने कहा,'' वह अपने नेटवर्क पर फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने को प्रतिबद्ध हैं।'' इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा,'' बहुआयामी प्रकृति की इस समस्या का कोई एक पक्का समाधान नहीं है।'' 

डोरसी सोशल मीडिया साइटों पर फर्जी संदेशों और सूचनाओं के प्रसार तथा इनसे कई बार कानून एवं व्यवस्था की समस्या पैदा होने की चिंताओं के बीच डोरसी भारत आए थे।