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श्रीलंका में भंग हुई 225 सांसदों वाली संसद, 5जनवरी 2019 को होंगे चुनाव

चारो तरफ समुद्र से घिरे छोटे से देश श्रीलंका में पिछले दिनों एक बंदरगाह भारत को लिज पर दिए जाने का विवाद इस कदर गहराया कि 225सदस्यों वाली संसद भंग करने की नौबत आ गई। इसके चलते पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे बर्खास्त किए गए। उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाया गया। यह बदलाव प्रधानमंत्री पद से बर्ख़ास्त किए गए रानिल विक्रमासिंघे की पार्टी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) को हजम नहीं हुई। उसने राष्ट्रपति के इस फैसले को ही अवैध करार दे दिया।

इस तरह से उत्पन्न हुई राजनैतिक संकट पैदा हो गई। इसे दूर करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने 9 नवंबर की मध्यरात्री में संसद भंग करने के दिए आदेश दे दिए। इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा चुकी है। फिर भी राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कारण अक्टूबर में जब राष्ट्रपति सिरिसेना ने राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री बना तो दिया थालेकिन विक्रमासिंघे ने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा था कि उन्हें हटाना अवैध है।

उल्लेखनीय है कि 2015 में लंबे समय से राष्ट्रपति रहे राजपक्षे को सिरिसेना और विक्रमासिंघे के गठबंधन ने हराया था। इस गठबंधन में शुरू से ही दरार बनी हुई थी। यह दरार दोनों के बीच तब और बढ़ गई थी जब सरकार की भारत को एक बंदरगाह लीज़ पर देने की योजना बनी। इस विवाद के बाद दोनों पक्ष सरकार चलाने का दावा तो कर रहे थेलेकिन बर्ख़ास्त प्रधानमंत्री ने अपना निवास टेम्पल ट्रीस छोड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति के इस क़दम को असंवैधानिक बताते हुए संसद सत्र बुलाने की मांग की थी। ठोस  नतीजा नहीं निकला।

अंतत: सिरिसेना ने विक्रमासिंघे को पद से हटाते हुए राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया।  राजपक्षे ने न केवल नए मंत्रिमंडल में शपथ लीबल्कि वित्तमंत्री का विभाग भी अपने पास रख लिया। संसद में समर्थन जीतने के लिए चार सांसदों को भी मंत्री पद दे दिए। हालांकि राजपक्षे पर भ्रष्टाचार और गृह युद्ध के दौरान ज़्यादती बरतने के आरोप लगते रहे हैं। दो सप्ताह तक चले राजनीतिक और संवैधानिक संकट के दौरान श्रीलंका में हिंसक घटनाएं भी हुईं।

गजट नोटिस के अनुसार 19 नवंबर से 26 नवंबर के बीच इस चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरे जाएंगे। चुनाव जनवरी को संपन्न होने के बाद नए संसद की बैठक 17 जनवरी को बुलाई जाएगी।