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600 फुट के सरदार पटेल, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा

कुछ खास बातें सरदार वल्लभ भाई पटेल की दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा के बारे में:

1. गुजरात में नर्मदा नटी के किनारे सरदार वल्लभ भाई पटेल की ऊंची प्रतिमा 182 मीटर यानि 600 फुट की है। इसके पैर 80 फुट और हाथ की लंबाई 70 फुट की है। इसे नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर बनाया गया है. यह न्यूयॉर्क के 93 मीटर उंचे 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' से दोगुना है. इस तरह से दुनिया में अब दूसरे स्थान पर ऊंची प्रतिमा चीन स्थित स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की मूर्ति है, जिसकी ऊंचाई 153 मीटर है.

2. स्टैच्यू आॅफ यूनिटी अगर राष्ट्र का गौरव और एकता का प्रतीक माना जाता है, वहीं सरदार पटेल की विशालकाय मूर्ति बनाने वाली कंपनी एलएंटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रहमण्यम के अनुसार भारतीय इंजीनियरिंग कौशल और परियोजना प्रबंधन की क्षमताओं का सम्मान भी है। इस प्रतिमा को  राम वी.सुतार की देखरेख में बनाया गया है।

3. पटेल की प्रतिमा के शिल्पकार राम वी.सुतार वर्ष 1999 में पद्मश्री और 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किए जा चुके हैं। उन्हें बांबे आर्ट सोसायटी के लाइफ टाइम अचीवमेंट समेत अन्य पुरस्कार भी  मिल चुका है। इन दिनों वे महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई के समुंदर में लगवाई जाने वाली शिवाजी की प्रतिमा की डिजाइन कर रहे हैं. इसे  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से भी ऊंची बनाने की योजना है। 

4. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को बनाने में मात्र 33 माह का समय लगा।  जबकि स्प्रिंग टेंपल के बुद्ध की मूर्ति के निर्माण में 11 साल का वक्त लग गया था।  

5. कंपनी के अनुसार स्टैच्यू आफ यूनिटी को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके निर्माण के अधिक कार्य देश में ही किए गए, जबकि कांसे की परत चढ़ाने में विदेश की मदद ली गई।

6. सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये। जबकि 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च करने हैं।

7. इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्तूबर, 2013 को सरदार पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर तभी रखी गई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। और तो और इसके निर्माण के लिए भाजपा ने पूरे देश में लोहा इकट्ठा करने का अभियान भी चलाया था।

प्रस्तुति: दिनचर्या डेस्क